कोरोना वायरस : अमेरिकी बायोटेक फर्म मॉडर्ना की ओर से विकसित प्रायोगिक टीके का दूसरा चरण सफल रहा

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अमेरिकी बायोटेक फर्म मॉडर्ना की ओर से विकसित प्रायोगिक टीका ‘एमआरएनए-1273’ दूसरे दौर की आजमाइश पर खरा उतरा है।कोरोना के खिलाफ जंग में एक बड़ी कामयाबी मिली है। इसकी मदद से सभी 45 प्रतिभागियों में सार्स-कोव-2 वायरस से लड़ने में सक्षम एंटीबॉडी पैदा करना मुमकिन हो सका है।

गंभीर साइडइफेक्ट नहीं
-परीक्षण के दौरान 18 से 55 साल के किसी भी प्रतिभागी में कोई गंभीर साइडइफेक्ट नहीं पनपे। हालांकि, आधा से ज्यादा प्रतिभागियों में सिरदर्द, कंपकंपी, थकान, सुस्ती, मांसपेशियों में दर्द की शिकायत जरूरत सामने आई। कुछ प्रतिभागियों ने शरीर के उस हिस्से में दर्द की बात कही, जहां इंजेक्शन लगाया गया था। सभी साइडइफेक्ट दूसरी खुराक देने के बाद उभरे थे।

27 जुलाई से अंतिम परीक्षण
-मॉडर्ना 16 मार्च को कोरोना के इलाज में सक्षम टीके का मानव परीक्षण शुरू करने वाली पहली अमेरिकी कंपनी बनी थी। उसने सार्स-कोव-2 वायरस की जेनेटिक संरचना का खुलासा होने के 66 दिन बाद ‘एमआरएनए-1273’ का असर आंकना शुरू किया था। अब कंपनी 27 जुलाई से अंतिम दौर के मानव परीक्षण की तैयारियों में जुट गई है। इसमें 30 हजार प्रतिभागी शामिल होंगे।

दो साल में मिलेंगे नतीजे
-अंतिम दौर के परीक्षण में आधे प्रतिभागियों को 100 माइक्रोग्राम टीका लगाया जाएगा तो आधों को प्लेसिबो दिया जाएगा। इसके बाद शोधकर्ता लगातार दो साल तक हर प्रतिभागी की सेहत पर नजर रखेंगे। वे देखेंगे कि टीका वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है। या फिर अगर प्रतिभागी संक्रमित होते हैं तो कहीं यह कोरोना के लक्षणों को पनपने से तो नहीं रोकता है।

ऐसे काम करता है टीका
-‘एमआरएनए-1273’ के निर्माण में राइबोन्यूक्लिक एसिड (आरएनए) का इस्तेमाल किया गया है
-आरएनए एक केमिकल मेसेंजर है, जिसमें प्रोटीन के निर्माण से जुड़ा जेनेटिक कोड सहेजा होता है
-शरीर में प्रवेश के बाद ‘एमआरएनए-1273’ कोशिकाओं को कोरोना वायरस की बाहरी सतह से मिलता-जुलता प्रोटीन बनाने का निर्देश देता है
-प्रतिरक्षा कोशिकाएं इस प्रोटीन को बाहरी तत्व के तौर पर देखती हैं, साथ ही शरीर में इनसे लड़ने में सक्षम एंटीबॉडी का उत्पादन शुरू कर देती हैं

संक्रमण से उबरने वालों से ज्यादा एंटीबॉडी बने
-लीजा ए जैक्सन के नेतृत्व में एमोरी यूनिवर्सिटी सहित कई अन्य केंद्रों पर हुए परीक्षण के दौरान शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों को तीन समूह में बांटा। 28 दिन के अंतराल पर पहले, दूसरे और तीसरे समूह को दो बार क्रमश: 25, 100, 250 माइक्रोग्राम टीका लगाया। इस दौरान दूसरा टीका लगने के साथ ही प्रतिभागियों में कोरोना संक्रमण से उबरने वाले मरीजों से ज्यादा एंटीबॉडी बनते नजर आए।

उम्मीद की किरण
-50 करोड़ टीका सालाना बनाने में सक्षम होने का दावा किया है मॉडर्ना ने मौजूदा समय में
-01 अरब टीके बनाने की क्षमता हासिल कर लेगी स्विस फर्म लोंजा की मदद से 2021 तक

इनसे राहत की आस
टीका निर्माता चरण
-एजेडडी1222 ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, जेनर इंस्टीट्यूट दूसरे/तीसरे दौर का परीक्षण जारी
-बीएनटी162 फाइजर, बायोएनटेक पहले/दूसरे चरण की आजमाइश जारी
-बीबीआईबीपी-कॉरवी बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स पहले/दूसरे दौर का परीक्षण जारी
-कोरोनावैक साइनोवैक रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड पहले/दूसरे चरण की आजमाइश जारी
-गैम-कोविड-वैक गैमेलया रिसर्च इंस्टीट्यूट, एसिलेना ड्रग रिसर्च एंड डेवलपमेंट पहले/दूसरे दौर का परीक्षण जारी

सात भारतीय कंपनियां भी दौड़ में
-भारत की सात दवा निर्माता कंपनियां भी कोरोना वायरस के इलाज में कारगर टीका बनाने की कोशिशों में जुटी हैं। इनमें से भारत बायोटेक और जाइडस के टीके का मानव परीक्षण शुरू करने की इजाजत भी मिल चुकी है।