एक जीत पर इतना क्या इतराना, भारत को हराकर अनर्गल बयानबाजी में जुटे हैं पाकिस्तानी

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दुबई। 1992 से 2019 तक 12 विश्व कप मुकाबलों में भारत ने पाकिस्तान को हराया, लेकिन कभी भी किसी भारतीय क्रिकेटर और राजनेता ने पड़ोसी देश के लिए अमर्यादित बयान नहीं दिए, लेकिन दुबई में रविवार को हुए टी-20 विश्व कप के मुकाबले में पाकिस्तान की 10 विकेट से जीत के बाद वहां के राजनेताओं ने ही नहीं, बल्कि कुछ पूर्व क्रिकेटरों ने भी अनर्गल प्रलाप करना शुरू कर दिया है।1996 विश्व कप में भारत के खिलाफ जबरदस्त मार खाने वाले पाकिस्तानी गेंदबाज वकार यूनिस ने एक पाकिस्तानी टीवी चैनल पर कहा है कि उन्हें मैच की सबसे अच्छी बात मुहम्मद रिजवान का ‘हिंदुओं के बीच मैदान पर नमाज पढ़ना’ लगी।

इसके अलावा वहां के मंत्री शेख राशिद पाकिस्तान की जीत को ‘इस्लाम की जीत’ बताते हैं। जहां एक तरफ मैच जीतने के बाद दोनों देशों के खिलाड़ी एक-दूसरे से मुहब्बत और इज्जत के साथ मिले तो दूसरी ओर राशिद ने जहर उगलते हुए कहा था कि पाकिस्तान की टीम को, पाकिस्तान की कौम को मुबारक हो। आज हमारा फाइनल था। दुनिया के मुसलमान समेत हिंदुस्तान के मुसलमानों के जज्बात पाकिस्तानी टीम के साथ थे। सारी आलमी इस्लाम को फतह मुबारक हो। यही नहीं, जब पाकिस्तानी टीम जीती तो आइसीसी विश्व कप के आधिकारिक कमेंटेटर और पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर बाजिद खान ने बाबर से कहा कि ‘लेकिन कुफ्र तो टूट गया’। इस पर बाबर ने जवाब दिया ‘ये तो अल्लाह का करम है।’ कुफ्र अरबी का लफ्ज है। इसका मतलब है खु़दा को मानने से इन्कार करना। इस्लामिक मत से अलग मत रखना भी कुफ्र माना जाता है।

इंटरनेट मीडिया पर बाजिद की काफी आलोचना हो रही है। लोगों की शिकायत है की आखिर आइसीसी के मंच से ऐसी भाषा कैसे बोली जा सकती है। लोग बाजिद को निलंबित करने की मांग भी कर रहे हैं। हालांकि, आइसीसी में काम करने वालों से जब इस बारे में बात की गई तो उन्हें इस बारे में पता ही नहीं था। उन्हें कुफ्र का मतलब भी नहीं पता था। वहीं हमें याद करना चाहिए जब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में वर्ष 2004 में भारतीय टीम ने पाकिस्तान का ऐतिहासिक दौरा किया था तो वाजपेयी ने कहा था कि सिर्फ कप नहीं, दिल भी जीतकर आना। भारत ने पहली बार पाकिस्तान में वनडे और टेस्ट सीरीज जीती थी।

पाकिस्तान की तरफ से हो रही हरकतों पर बीसीसीआइ ने कोई बयान नहीं दिया है। वहीं बाजिद खान पर आइसीसी ने आधिकारिक तौर पर बयान नहीं दिया, लेकिन एक पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने कहा कि एक जीत पर इतना भी क्या इतराना है। हमने तो उन्हें इससे पहले हर बार हराया है। जब न्यूजीलैंड ने पाकिस्तान का दौरा रद किया था तो वहां के प्रधानमंत्री और पूर्व क्रिकेटर इमरान खान कह रहे थे कि खेल को राजनीति से दूर रखना चाहिए। वहां के कई पूर्व क्रिकेटर भी भारत से द्विपक्षीय सीरीज खेलने के लिए यह कहते हैं कि राजनीति और खेल को अलग-अलग रखें। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड भी कुछ ऐसी ही बातें करता है, लेकिन एक जीत के बाद वे ऐसी बयानबाजी कैसे कर सकते हैं। अगर आप जीते हैं तो खुशी मनाएं।

भारतीय कप्तान विराट कोहली और मेंटर महेंद्र सिंह धौनी मैच हारने के बाद कितने प्यार से टीम से मिल रहे थे। उनकी जीत पर अधिकतर पूर्व भारतीय क्रिकेटरों ने बधाई दी। हालांकि, ये पहली बार नहीं है। जब 2007 टी-20 विश्व कप के फाइनल में पाकिस्तानी टीम भारत से हारी थी तब शोएब मलिक ने मैच के बाद तत्कालीन कमेंटेटर रवि शास्त्री से कहा था कि मैं पाकिस्तान के लोगों और पूरे विश्व के मुस्लिमों को धन्यवाद देना चाहता हूं। हालांकि, उस मैच के मैन आफ द मैच भारतीय टीम के खिलाड़ी इरफान पठान थे।इसमें एक बात और ध्यान देने वाली है जब 2019 विश्व कप में महेंद्र सिंह धौनी इंडियन पैरा स्पेशल फोर्स के प्रतीक चिह्न ‘रेजिमेंटल डैगर’ वाले दस्ताने पहनकर उतरे थे तो आइसीसी ने कहा था कि वह दोबारा ये दस्ताने नहीं पहनें। तब आइसीसी की जनरल मैनेजर (स्ट्रेटजिक कम्युनिकेशंस) क्लेयर फरलांग ने कहा था कि यह नियमों के खिलाफ है, हमने इसे हटाने का अनुरोध किया है।

मालूम हो कि आइसीसी का मानना है कि आप क्रिकेट का राजनीतिक और धार्मिक इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।वहीं भारतीय खिलाड़ी मुहम्मद शमी के समर्थन में पाकिस्तानी विकेटकीपर मुहम्मद रिजवान ने ट्वीट किया कि जिस तरह का दबाव, संघर्ष और त्याग एक खिलाड़ी को अपने देश और अपने लोगों के लिए खेलते हुए करना होता है उसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। शमी एक स्टार हैं और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज में शामिल हैं। प्लीज अपने स्टार की इज्जत कीजिए। खेल से लोगों को करीब लाना चाहिए, न कि उन्हें बांटना चाहिए। हालांकि, ये बात रिजवान अपने देश के पूर्व क्रिकेटरों को भी समझा देते तो बेहतर होता कि खेल से लोगों को बांटें नहीं, बल्कि करीब लाएं।