इरफान पठान ने बयां किया अपना दर्द, कहा- गेंद को स्विंग कराना कभी नहीं भूला

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मुंबई : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज इरफान पठान ने 35 साल की उम्र में क्रिकेट को अलविदा कह दिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी गेंद को स्विंग कराने की कला को कमजोर नहीं पड़ने दिया और उनके प्रदर्शन में आई गिरावट के लिए पूर्व कोच ग्रेग चैपल को दोषी ठहराना असली मुद्दे को भटकाना मात्र ही था। अधिकतर खिलाड़ी भारतीय टीम के साथ अपना करियर 27-28 साल में शुरू करते हैं लेकिन उन्होंने इस उम्र में अपना आखिरी मैच खेल लिया था। पठान तब 27 साल के थे जब उन्होंने 2012 में अपना आखिरी मैच खेला था। ऐसा भी समय था जबकि बायें हाथ के इस तेज गेंदबाज के सभी तीनों प्रारूप में खेलने को लेकर भी सवाल उठाये गये।

इरफान पठान ने पीटीआइ से बात करते हुए कहा कि इस तरह की सभी बातें …. लोगों का ग्रेग चैपल को लेकर बात करना, ये सब चीजों को मुद्दों से भटकाना मात्र था। इस तरह की बातें भी सामने आयी कि इरफान खेल में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। उन्होंने एक एक ऐसा माहौल तैयार कर दिया कि इरफान का स्विंग पर पहले जैसा अधिकार नहीं रहा, लेकिन लोगों को यह समझने की जरूरत है कि पूरे मैच में आपको वैसी स्विंग नहीं मिलेगी जैसी पहले दस ओवरों में मिलती है। मैं अब भी गेंद को स्विंग कराने में पूरी तरह से सक्षम हूं।

उन्होंने कहा कि मेरे प्रदर्शन को लेकर बातें होती है, लेकिन टीम में मेरी भूमिका अलग थी। मुझे रनों पर लगाम लगाने का काम दिया गया था। मुझे याद है कि साल 2008 में श्रीलंका में मैच जीतने के बाद भी मुझे टीम से बाहर कर दिया गया था। देश के लिए मैच जीतने के बाद भी बिना किसी वजह से बाहर किया जाता है।

अपनी चोट के बारे में इरफान पठान ने कहा कि मैं हमेशा तीनों प्रारूप में खेलना चाहता था। मैं 2009-10 में पीठ दर्द से परेशान रहा। मुझे सारे तरह के स्कैन कराने पड़े जो कि आपके शरीर के लिये सही नहीं होते लेकिन मैंने ऐसा इसलिए किया ताकि पता चल सके कि मेरे पीठ दर्द की वास्तविक वजह क्या है। पठान ने कहा कि दुर्भाग्य से तब हमारे पास वैसी मशीनें नहीं थी जिससे स्पष्ट पता चल पाता कि मेरी पीठ दर्द का क्या कारण है। मैं दो साल तक पीठ दर्द से जूझता रहा और स्थिति बिगड़ती रही लेकिन मैंने रणजी ट्राफी में खेलना नहीं छोड़ा। पठान ने कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी तरफ से पूरे प्रयास किये।

उन्होंने कहा कि उस दौर में मेरी गति कम हो गयी थी क्योंकि मैं पूरी तरह से फिट नहीं था। मैं अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहा था क्योंकि मैं इस खेल को चाहता हूं। मैंने रणजी ट्राफी में बड़ौदा की अगुवाई भी की। मुझे ऐसा क्यों करना चाहिए था। मैं देश की तरफ से खेलना चाह रहा था और टेस्ट क्रिकेट में वापसी करना चाहता था।