आज ही के दिन विश्व कप के नॉकआउट मैच में जब ‘सौरव गांगुली’ ने रचा था इतिहास

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उमेश राजपूत। कहते हैं कि ना तो इतिहास हर दिन बनते हैं और ना ही हर दिन दोहराए जाते हैं। इतिहास की कुछ ऐसी ही दिलचस्प उधेड़बुन भारतीय क्रिकेट के साथ जुड़ी है। आज से ठीक 17 साल पहले 20 मार्च 2003 के दिन तत्कालीन कप्तान और मौजूदा बीसीसीआइ अध्यक्ष सौरव गांगुली ने एक ऐसा इतिहास रचा था जिसे किसी भारतीय बल्लेबाज को दोहराने में 12 साल लग गए लेकिन, उसके बाद अभी कोई तीसरा भारतीय बल्लेबाज इस कारनामे को अंजाम नहीं दे सका है। दरअसल, गांगुली ने इस दिन डरबन में खेले गए विश्व कप के सेमीफाइनल में केन्या के खिलाफ नाबाद 111 रन की पारी खेली थी और इसी के साथ वह विश्व कप के नॉकआउट दौर में शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने थे।

नॉकआउट में आसान नहीं शतक: भारतीय बल्लेबाजों के लिए विश्व कप के नॉकआउट मुकाबलों में शतक लगाना मुश्किल रहा है। भारत ने अब तक खेले गए सभी 12 विश्व कप में भाग लिया और इस दौरान कुल 13 नॉकआउट मुकाबले खेले हैं, लेकिन इनमें शतक सिर्फ दो ही बने हैं। हालाकि, 2011 में भारत ने विश्व कप जीता था, जिसके फाइनल में गौतम गंभीर के पास शतक लगाने का बेहतरीन मौका था, लेकिन वह 97 रन पर आउट हो गए। बाद में इसी फाइनल में धौनी विजयी छक्का लगाने के बावजूद नाबाद 91 रन बनाकर पवेलियन लौटे थे।

अजब संयोग: गांगुली व रोहित के विश्व कप नॉकआउट मैचों के साथ अजब संयोग जुड़ा। इन दोनों ही मौकों पर टीम को अपने अगले मुकाबलों में हार मिली और उसका विश्व कप जीतने का सपना टूट गया। उस पर भी इत्तेफाक यह कि दोनों ही मौकों पर भारत को ऑस्ट्रेलिया ने हराया। 2003 में जहां भारत फाइनल में हारा था तो 2015 में सेमीफाइनल में, जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को हराकर खिताब जीता था।