ग्रीन टेक्नोलॉजी से छत्तीसगढ़ में बनेंगी सड़क, केंद्र ने दी प्लास्टिक वेस्ट से निर्माण की अनुमति

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में ग्रीन टेक्नोलॉजी से 2290 करोड़ की सड़कों का निर्माण किया जाएगा। केंद्र सरकार ने पर्यावरण के अनुकूल वेस्ट प्लास्टिक से सड़क निर्माण की स्वीकृति दी है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसे केंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग ने 22 सौ करोड़ की राशि स्वीकृत की है। पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि ग्रामीण विकास विभाग की ओर से 14 अगस्त को प्रस्ताव मंगाया गया था। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना अंतर्गत राज्य की पिछले एक वर्ष की उपलब्धि को देखते हुए भारत सरकार ने राशि स्वीकृत की है। यह बेहद खुशी की बात है कि विभाग में एक साल में बेहतर काम हुआ, जिसके कारण केंद्र सरकार ने सबसे पहले राज्य के तौर पर छत्तीसगढ़ को चुना है। विभाग के अधिकारियों ने जनता के मंशानुरूप कार्ययोजनाओं पर समय-सीमा में बेहतर कार्य किया है।

छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त मध्यप्रदेश में 1440 किमी लंबाई तथा आंध्रप्रदेश में 150 किमी लंबाई की सड़कों का प्रस्ताव स्वीकृति के लिए भेजा गया, लेकिन प्रस्ताव में कमियों के कारण अब तक स्वीकृति नहीं दी गई है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी आलोक कटियार ने बताया कि राज्य शासन से अनुमति प्राप्त कर निविदा की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी, ताकि आगामी वित्तीय वर्ष तक कार्य पूर्ण किया जा सकें।

नक्सल प्रभावित आठ जिलों में 638 करोड़ से 1240 किलोमीटर सड़कें : प्रदेश के नक्सल प्रभावित आठ जिलों में 1240 किमी सड़क का निर्माण होगा। इन सड़कों के निर्माण में 638 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसकी सहमति शुक्रवार को नई दिल्ली में भारत सरकार ग्रामीण विकास मंत्रालय की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की आयोजित बैठक में दी गई है। लोक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू ने बताया कि राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी और सुदूर ग्रामीण अंचलों को जोड़ने के लिए राज्य सरकार की पहल पर यह स्वीकृति प्राप्त हो रही है। इसमें डामरीकरण के साथ-साथ कुछ स्थानों पर प्रायोगिक तौर पर कोल्ड मिक्स टेक्नोलाजी, वेस्ट प्लास्टिक और स्वाईल स्टेबिलाईजेशन तकनीक का भी प्रयोग किया जाएगा। बैठक में पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता डीके अग्रवाल उपस्थित थे। एसीएस अमिताभ जैन ने वीडियो कांफ्रेसिंग से चर्चा में भाग लिया।

ऐसे मिला छत्तीसगढ़ को फंड

पंचायत विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पीएमजीएसवाई-तीन के लिए केंद्र ने गाइडलाइन तैयार की थी। विभिन्न् चरणों में बसाहटों की जनसंख्या के आधार पर जियो रिफरेंस फोटो भेजी गई। डीआरआरपी में शामिल सभी सड़कों को जीआइएस प्लेटफार्म पर विकाखंडवार डिजिटल किया गया। इसके बाद ट्रेस मैप बनाकर कैंडिडेट रोड तैयार किया गया। डीपीआर तैयार करके राज्य तकनीकी एजेंसी से अनुमोदन कराया गया। इस प्रकार वृहद स्तर पर उपरोक्त कार्यों को अल्प समय में संपादित कर 355 सड़कें, लंबाई तीन हजार 729 किमी का उन्नयन एवं 10 वृहद पुल की स्वीकृति का प्रस्ताव तैयार किया गया।