फैटी लिवर को हेल्दी लिवर में बदल सकते हैं ग्रीन टी और एक्सरसाइज बस जान लें ये तरीकाः शोध

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नॉन एल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज से जूझ रहे लोगों को नियमित रूप से एक्सरसाइज करने और हाई कैलोरी वाले पेय पदार्थों को कैफीनमुक्त डाइट ग्रीन टी से बदलने पर लिवर में सुधार की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। एक नए शोध में इस बात का खुलासा हुआ है। अध्ययन के शोधकर्ताओं ने पाया कि ग्रीन टी के अर्क और एक्सरसाइज के संयोजन से फैटी लिवर से संबंधित मोटापे की गंभीरता 75 फीसदी तक कम हो जाती है। हालांकि ये अध्ययन चूहों पर किया गया, जिन्हें हाई फैट डाइट दी गई थी।

अध्ययन के मुताबिक, हालांकि इंसानों पर इनका परीक्षण नहीं किया गया है लेकिन अध्ययन के नतीजें संभवित स्वास्थ्य रणनीति का सुझाव देते हैं।

अमेरिका की पेंसलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में फूड साइंस के सहायक प्रोफेसर जोशुआ लैंबर्ट का कहना है, ”इन दोनों को साथ में करने से लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं लेकिन हमारे पास अभी क्लीनिकल डेटा उपबल्ध नहीं है।”

लैंबर्ट का कहना है कि नॉन एल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है, जिसके और ज्यादा बिगड़ने की संभावना है। मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज जैसे जोखिम कारकों की उच्च दर के कारण फैटी लिवर डिजीज 2030 तक 1 अरब लोगों को अपनी चपेट में ले लेगा। इस बात पर और अधिक ध्यान देने की जरूरत है कि इस बीमारी के लिए कोई वैध चिकित्सा उपलब्ध नहीं है।

अध्ययन में चूहों को 16 सप्ताह तक हाई फैट डाइट खिलाई गई। इसके साथ ही उन्हें ग्रीन टी के अर्क और नियमित रूप से पहियों पर दौड़ाया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि ऐसा करने से उनके लिवर में सिर्फ एक चौथाई लिपिड ही जमा हुआ, विशेषकर उन चूहों की तुलना में, जिन्हें कंट्रोल समूह के अंतर्गत ग्रीन टी और एक्सरसाइज नहीं कराई गई।

अध्ययन के मुताबिक, वहीं जिन चूहों को सिर्फ ग्रीन टी का अर्क दिया गया फिर सिर्फ एक्सरसाइज कराई गई, उनके लिवर में दूसरों चूहों की तुलना में आधे से कम फैट जमा हुआ पाया गया। इसके अलावा अध्ययन में चूहों के लिवर टिश्यू का भी विश्लेषण किया गया। यह अध्ययन जर्नल ऑफ न्यूट्रिशनल बायोकैमेस्ट्री में प्रकाशित हुआ। शोधकर्ताओं ने चूहों के मल में फैट कंटेंट और प्रोटीन का भी आकलन किया।

उन्होंने पाया कि जिन चूहों को ग्रीन टी का अर्क दिया गया और एक्सरसाइज कराई गई उनमें मल संबंधी लिपिड और प्रोटीन लेवल भी अधिक पाया गया।

लैंबर्ट ने कहा, ”इन चूहों के लिवर की जांच करने के बाद अध्ययन के निष्कर्षों और शोध के दौरान उनकी मल के जांच करने के बाद हमने देखा कि जिन चूहों ने ग्रीन टी के अर्क का सेवन किया और नियमित रूप से एक्सरसाइज की उनमें पोषक तत्व अलग तरह से प्रोसेस हुए। साथ ही उनकी बॉडी ने अलग-अलग तरह से फूड को नियंत्रित किया।”

उन्होंने कहा, ”हमें लगता है कि ग्रीन टी में मौजूद पॉलीफेनोल और डाइजेस्टिव एंजाइम छोटी आंतों में अलग-अलग हो जाते हैं और आंशिक रूप से फूड में फैट, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट को तोड़ने से रोकते हैं।”उन्होंने कहा कि इसलिए अगर एक चूहा अपनी डाइट में फैट को नहीं पचा पा रहा है तो फैट और कैलोरी चूहे के पाचन तंत्र से होकर गुजर जाएगी और कुछ मात्रा उसके मल के जरिए शरीर से बाहर निकल जाएगी।