ऐसा मंदिर जहां इंडिया गेट की तर्ज पर प्रज्वलित हो रही है अमर जवान ज्योति

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रायपुर। देश की आजादी के लिए प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों की याद में जिस तरह देश की राजधानी दिल्ली के इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति प्रज्वलित हो रही है, उसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के रावांभाठा इलाके के बंजारी मंदिर के मुख्य द्वार पर देश के वीरों को सम्मान देने के लिए कुछ साल पहले अमर जवान ज्योति प्रज्वलित की गई थी। मंदिर में आने वाले भक्त मां बंजारी के दर्शन करने के साथ ही अमर जवान ज्योति के समक्ष सलामी देकर वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। मंदिर के समक्ष प्रज्वलित हो रही अमर जवान ज्योति बच्चों, युवाओं के मन में देशभक्ति की भावना जगा रही है। प्रतिदिन मंदिर में 500 से अधिक भक्त दर्शन करने आते हैं और सलामी देकर वीरों की गाथा को याद करते हैं।

मुख्य द्वार पर शान से लहरा रहा तिरंगा

बंजारी मंदिर परिसर में अमर जवान ज्योति के साथ ही शान से तिरंगा लहरा रहा है। एक ओर बंजारी माता के दर्शन करके बुजुर्ग भक्तिभाव में खो जाते हैं वहीं युवा अमर जवान ज्योति के समक्ष सलामी देकर उत्साह से लबरेज हो उठते हैं। इस मंदिर में देवी भक्ति के साथ देशप्रेम की लहर बह रही है।

भावी पीढ़ी में देशभ-क्ति की भावना जगाना उद्देश्य

बंजारी मंदिर के प्रमुख ट्रस्टी हरीश भाई जोशी बताते हैं कि अमर जवान ज्योति की स्थापना बंजारी धाम ट्रस्ट के नेतृत्व में की गई है। मंदिर ट्रस्ट का उद्देश्य है कि बच्चों और भावी पीढ़ी के मन में भक्तिभाव के साथ देशभक्ति की भावना पैदा हो। मंदिर में आने वाले हर भक्त के मन के भीतर देशभक्ति की ज्योति जलती रहे। मंदिर में दर्शन के लिए आने वाला हर श्रद्घालु पहले यहां मत्था टेकता है, वीरों की कुर्वानियों को याद करता है। इसके बाद मंदिर में प्रवेश करता है।

राष्ट्रीय ध्वज के साथ सेना के प्रतीक

अमर जवान ज्योति पर राष्ट्रीय ध्वज तो शान से लहरा ही रहा है, साथ ही सीआरपीएफ, बीएसएफ, वायु सेना, जल सेना के प्रतीक वाले ध्वज भी लहरा रहे हैं। समेत सेना के ध्वज हमेशा लहराते रहते हैं।

ट्रस्ट के स्कूल में फहराते हैं प्रतिदिन राष्ट्र ध्वज

बंजारी मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित गुरुकुल स्कूल प्रदेश का एकमात्र ऐसा स्कूल है जहां रोजाना राष्ट्र ध्वज फहराया जाता है। प्रार्थना में बच्चे राष्ट्रगीत गाते हैं और सलामी देने के बाद कक्षाएं शुरू होती हैं।

बंजारों की इष्टदेवी हैं मां बंजारी

रावांभाठा स्थित मां बंजारी मंदिर 500 साल से अधिक पुराना है। मुगलकालीन शासकों के दौर में इस मंदिर की स्थापना हुई थी। देश भर में घूमने वाले बंजारा जाति के लोग इस इलाके में अपना डेरा डालते थे। उन्होंने ही अपनी इष्टदेवी बंजारी की प्रतिमा स्थापित की थी। बंजारी माता की मूर्ति बगुलामुखी के रूप में प्रतिष्ठापित है।

40 साल पहले बना भव्य मंदिर

1980 के दौर में बंजारी मंदिर का नवनिर्माण किया गया। अब इस भव्य मंदिर में 25 फुट ऊंची शिव प्रतिमा मन को लुभाती है।

स्वर्ग-नरक की झांकी

मंदिर में स्वर्ग-नरक की झांकी आकर्षण का केंद्र है। अनेक मूर्तियों के माध्यम से दिखाया गया है कि अच्छे कर्म करने पर क्या सुख मिलता है और बुरे कर्म करने पर किस तरह का कष्ट भोगना पड़ता है।

गुरुकुल और गौशाला

मंदिर में चैत्र और क्वांर नवरात्रि पर हजारों मनोकामना ज्योति प्रज्ज्वलित होती है मंदिर के पीछे गौशाला और गुरुकुल का संचालन किया जा रहा है। गायों की सेवा के साथ बधाों को अध्यात्म की शिक्षा भी दी जा रही है॥