राजमाता विजयाराजे सिंधिया की स्मृति में प्रधानमंत्री मोदी आज जारी करेंगे सौ रुपए का सिक्का

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भोपाल। राजमाता विजयाराजे सिंधिया (Vijaya Raje Scindia) के जन्मशताब्दी समारोह का समापन 12 अक्टूबर सोमवार को होगा। इसका मुख्य कार्यक्रम नई दिल्ली में आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजमाता की स्मृति में सौ रुपए का एक स्मृति सिक्का जारी करेंगे। वहीं, मध्‍य प्रदेश के जिलों में राजमाता की स्मृति में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ग्वालियर और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय में राजमाता के जीवन पर केंद्रित चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने सोमवार को राज्‍य में राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जन्मशताब्दी के समापन पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को लेकर पार्टी जिलाध्यक्षों से ऑडियो ब्रिज के माध्यम से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आदर्श और श्रद्धा की प्रतिमूर्ति राजमाता ने भारतीय जनसंघ और भाजपा को अपनी मेहनत और त्याग के बल पर सींचा है। उनके आशीर्वाद से आज भाजपा दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बना है। जन्मशताब्दी वर्ष के समापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सौ रुपये का सिक्का जारी करेंगे।

प्राप्‍त जानकारी के मुताबिक, वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुबह 11 बजे होने वाले इस कार्यक्रम में लाखों लोग जुड़ेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि शाम सात बजे दूरदर्शन पर राजमाता सिंधिया के जीवनवृत्त पर केंद्रित डाक्यूमेंट्री का प्रसारण होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि 12 अक्टूबर को राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जयंती है। इस खास अवसर पर 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया जाएगा। यह उनके जन्मशताब्दी उत्सव का हिस्सा है और उनके महान व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि देने का एक मौका…

बता दें कि सिंधिया जनसंघ की नेता थीं और भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक थीं। राजघराने से ताल्लुक रखने वाली सिंधिया भाजपा के बड़े चेहरों में से एक थीं और हिंदुत्व मुद्दों पर काफी मुखर थीं। उनका जन्म 12 अक्टूबर, 1919 को हुआ था। उनकी बेटियां वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और पौत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया जो मौजूदा वक्‍त में भाजपा के वरिष्ठ नेता भी हैं। बीते दिनों राजमाता की पुत्री एवं मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने सिक्के के साथ प्रधानमंत्री का आभार जताने के लिए ट्वीट कर कहा था कि ऐतिहासिक परख से भरी है आपकी दृष्टि। आपने जन और जनसंघ दोनों की भावनाओं का सम्मान किया है।