फ्लोर टेस्ट पर पीसी शर्मा का बयान, मानेंगे SC का फैसला, BJP को सिर्फ सत्ता से प्यार

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भोपाल : मध्य प्रदेश की सियासत में घमासान खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. जहां एक तरफ पिछले 2 दिनों से सूबे के सियासी संकट पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है. वहीं कांग्रेस और बीजेपी के बीच भी बयानबाजियों का दौर जारी है. राजनीतिक हलचल पर कमलनाथ सरकार में मंत्री पीसी शर्मा ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी निर्णय होगा. हम उसे मानेंगे.

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में बहुमत परीक्षण के बिना विधानसभा बजट सत्र स्थगित किए जाने के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत 10 विधायकों ने याचिका दायर की थी. पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, नेता विपक्ष गोपाल भार्गव, बीजेपी के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह, रामेश्वर शर्मा, विष्णु खत्री, विश्वास सारंग, संजय सत्येंद्र पाठक, कृष्णा गौर और सुरेश राय ने याचिका दायर कर विधानसभा स्पीकर के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें स्पीकर ने विधानसभा को 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया था.

बीजेपी ने याचिका में कहा था कि कांग्रेस सरकार 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद अल्पमत में आ गई है.कांग्रेस के पास बहुमत नहीं है. बीजेपी ने कहा कि लोकतंत्र और संवैधानिक नियमों के मुताबिक कांग्रेस को एक दिन भी सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है.

मंत्री पीसी शर्मा ने 22 विधायकों के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विधायकों के इस्तीफे पर विधानसभा अध्यक्ष का विशेषाधिकार है. वो जो भी फैसला लेंगे, उसे माना जाएगा. इसी के साथ उन्होंने दावा किया कि विधायकों के इस्तीफे में एक ही तरह के 7 हस्ताक्षर किए गए हैं. इसलिए स्वीकार नहीं किए गए.

गौरतलब है कि कांग्रेस के 22 विधायक इस्तीफा सौंप चुके हैं. लेकिन अभी तक केवल 6 विधायके त्यागपत्र को मंजूरी दी गई है. जिसे लेकर बीजेपी विधानसभा स्पीकर एनपी प्रजापति पर बरस रही है.

वहीं मंत्री पीसी शर्मा ने कोरोना वायरस की वजह से सदन को 26 मार्च तक स्थगित किए जाने पर कहा कि भाजपा को कोरोना महामारी से कोई लेना-देना नहीं है, उन्हें सत्ता चाहिए.