छत्तीसगढ़ में गांधी-गोडसे के बाद अब ‘राम पॉलीटिक्स’

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रायपुर । महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर गांधी और गोडसे शुरू हुई सियासत अब दशहरा और दिवाली के माहौल में राम पॉलीटिक्स में बदल गई है। पहले मंत्री रविंद्र चौबे और नेता-प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने भगवान राम को सियासत के चक्कर में बांट दिया। अब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के कण-कण में भगवान राम के बसे होने की बात कहकर यह बताया है कि भगवान राम किसी एक दल या संगठन के नहीं हैं। गांधी जयंती के एक दिन पहले मुख्यमंत्री बघेल ने भाजपा और आरएसएस से गोडसे मुर्दाबाद के नारे लगाने की मांग की, तो गांधी और गोडसे पर सियासत गरमा गई थी। सड़क से लेकर सदन तक कांग्रेस और भाजपा गांधी प्रेम दिखाने में लगे रहे।

गांधी पर विधानसभा का विशेष सत्र खत्म हुआ कि राम प्रेम शुरू हो गया। राम पालीटिक्स की शुरुआत भाजपा ने की। गुरुवार को भाजपा ने रामलीला के बहाने कांग्रेस पर वोट बैंक बनाने की कोशिश का आरोप लगाया था। इसका जवाब देते हुए मंत्री चौबे ने कांग्रेस और भाजपा के राम को अलग-अलग बता दिया। उन्होंने कहा था कि उनके और हमारे राम में अंतर है। भाजपा के राम मॉब लिंचिंग और चंदा और वोट बटोरने के हैं। चौबे के बयान पर नेता-प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने पलटवार करते हुए कहा था कि हम एक राम को जानते हैं, कांग्रेस के कई राम होंगे। राम पॉलीटिक्स अभी जारी है। मुख्यमंत्री ने शनिवार को एक कार्यक्रम में अपने भाषण को राम पर ही फोकस रखा।

उन्होंने अपने भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राम को छत्तीसगढ़ की ग्रामीण परंपरा से जोड़ा। बच्चों के नाम के पीछे राम जोड़ने की प्रथा है। राम की माता कौशल्या का चंदखुरी में मंदिर, शिवरीनारायण में राम मंदिर, शबरी के गांव, तुरतुरिया के वाल्मीकि आश्रम में लव-कुश के जन्म की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि रामायण का दस साल का कार्यकाल छत्तीसगढ़ से जुड़ा है।

रावण दहन अब कांग्रेसियों के हाथ, रामलीला भी कराया

राजधानी के डब्ल्यूआरएस मैदान में प्रदेश का सबसे बड़ा रावण जलाया जाता है। अभी तक रावण दहन का कार्यक्रम पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के मंत्री राजेश मूणत की अध्यक्षता में होता था, लेकिन अब सरकार के बदलने के बाद कांग्रेस के विधायकों ने डब्ल्यूआरएस रावण पर कब्जा कर लिया है। सत्ता में आने के बाद शहीद स्मारक भवन में पहली बार कौशल्या के राम रामलीला का आयोजन किया गया। आयोजन समिति में ज्यादा कांग्रेसी नेता ही हैं।