MP में कमल खिलाने के बाद पहली बार ग्वालियर आ रहे सिंधिया, 22 अगस्त को ज्योतिरादित्य का शक्ति प्रदर्शन

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मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया पहली बार अब बतौर भाजपा सांसद अपने शहर ग्वालियर आ रहे हैं. इस दौरान बीजेपी बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने जा रही है, जिसमे सभी बड़े भाजपा नेता मौजूद रहेंगे.
ग्वालियर-चंबल में ज्योतिरादित्य का शक्ति प्रदर्शन
22 अगस्त से भारतीय जनता पार्टी सिंधिया के प्रभाव वाले ग्वालियर-चंबल संभाग में बड़ा सदस्यता अभियान शुरू करने जा रही है. सदस्यता अभियान की शुरुआत 22 अगस्त को ग्वालियर से होगी. भाजपा का दावा है कि 22 अगस्त से लेकर 24 अगस्त तक कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ता भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता लेंगे.
बीजेपी इस सदस्यता अभियान को एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन बनाने में जुटी है. यही वजह है कि इस दौरान खुद राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा भी मौजूद रहेंगे. सदस्यता अभियान के अलावा गुना, ग्वालियर, मुरैना और भिंड लोकसभा क्षेत्र में भाजपा संगठन की बैठक भी होगी जिसमें इन क्षेत्रों के सांसद, विधायक और स्थानीय संगठन के नेता भी मौजूद रहेंगे.
उपचुनाव में खास है ग्वालियर-चंबल संभाग
दरअसल, कमलनाथ सरकार के गिरने के बाद मध्यप्रदेश में 27 सीटों पर उपचुनाव तय हैं. इनमे से ग्वालियर-चंबल संभाग की 16 सीटें हैं. ये इलाका सिंधिया के प्रभाव वाला इलाका माना जाता है. सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद यहां एक तरह से कांग्रेस का संगठन बिखर गया है और इसलिए ग्वालियर-चंबल संभाग के कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बड़ी संख्या में भाजपा की सदस्यता दिलवा कर सत्तारूढ़ भाजपा अपना दम दिखाना चाहती है.
कांग्रेस ने बताया हार का डर
ग्वालियर-चंबल संभाग में होने जा रहे इस शक्ति प्रदर्शन को कांग्रेस ने सिंधिया और भाजपा का डर बताया है. कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने कहा कि ‘भाजपा नेता ये समझ चुके है कि अपने मान-सम्मान को सबसे ऊपर रखने वाले ग्वालियर-चंबल संभाग के लोग आगामी उपचुनाव में कमलनाथ सरकार के साथ किए धोखे का बदला बीजेपी को हराकर लेंगे, इसलिए ये दिखावा किया जा रहा है जबकि अंदर से बीजेपी को भी मालूम है कि उपचुनाव में उसका जीतना मुश्किल है’.
बता दें कि इस उपचुनाव के नतीजों का असर सूबे की सरकार की सेहत पर भी पड़ सकता है, इसलिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों इस उपचुनाव को गंभीरता से ले रही है.