केन-बेतवा लिंक परियोजना के एमओयू पर हस्ताक्षर

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भोपाल : पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि वर्षों से लंबित केन-बेतवा लिंक परियोजना का एमओयू हस्ताक्षर होना स्वागत योग्य है, इस परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र का विकास होगा लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार के दबाव में शिवराज सरकार ने अनुबंध की शर्तों के विपरीत कई मुद्दों पर झुककर प्रदेश के हितों के साथ समझौता किया है। इस योजना की शुरुआत वर्ष 2005 से हुई थी, 2008 में इसका खाका तैयार हुआ था, वर्षों से यह परियोजना लंबित थी, वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस परियोजना के अमल को लेकर केंद्र सरकार को निर्देश दिए थे। इस परियोजना में तय अनुबंध की शर्तों के विपरीत मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में पानी के बंटवारे लेकर मुख्य विवाद था।

मध्यप्रदेश रबी सीजन के लिए 700 एमसीएम पानी उत्तप्रदेश को देने पर सहमत था लेकिन उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा अधिक मात्रा में पानी देने का दबाव बनाया जा रहा था,जबकि इस परियोजना से हमारे प्रदेश के कई गाँव, जंगल डूब रहे हैं। डूबत क्षेत्र के कई गाँवों का विस्थापन हमें करना पड़ेगा, पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र की 5500 हेक्टेयर जमीन सहित करीब 9 हजार हेक्टेयर जमीन डूब में आ रही है। हमारा बड़ा क्षेत्र डूब रहा है,कुछ पर्यावरण आपत्तियाँ भी थी, इस परियोजना से उत्तरप्रदेश को मध्यप्रदेश के मुक ाबले अधिक लाभ होना है , इसलिये वर्षों से कई मुद्दों पर हमारी आपत्ति थी। कमलनाथ ने कहा कि शिवराज सरकार ने मोदी सरकार के दबाव में कई मुद्दों पर झुककर प्रदेश के हितों के साथ समझौता किया है , प्रदेश हित के मुद्दों की अनदेखी की है। शिवराज सरकार को इस परियोजना को लेकर शुरु में तय अनुबंधों की शर्तों , विवाद के प्रमुख बिंदुओं , इस परियोजना में मध्यप्रदेश के हितों की अनदेखी , नुकसान पर ली गयी आपत्तियों व वर्तमान एमओयू में तय शर्तों की जानकारी सार्वजनिक कर प्रदेश की जनता को वास्तविकता बताना चाहिए।