स्वास्थ्य मंत्री- कैसे जा रही है इतने मासूमों की जान डाॅक्टर- लास्ट स्टेज में आते हैं, उन्हें बचाना कठिन

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जगदलपुर . मेडिकल कॉलेज के एनआईसीयू में आठ सौ बच्चों की मौत की खबर भास्कर ने सबसे पहले प्रकाशित की थी। इस खबर के प्रकाशन के बाद बच्चों की मौतों के कारण जानने और मेकाॅज के एनआईसीयू की व्यवस्था को देखने खुद स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अफसरों से पूरी वस्तुस्थिति जानी और बच्चों की मौत के संबंध विस्तृत विवरण लिया। इसके बाद डाॅक्टरों से पूछा की मौतों को रोकने के लिए क्या उपाय किये जा सकते हैं। इस बैठक में पांच जिलों के कलेक्टर, कमिश्नर और स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर मौजूद रहे।

बैठक में सबसे पहले मंत्री ने बस्तर में मच्छरों से फेल रहे मलेरिया और अन्य बीमारियों के रोकथाम के निर्देश दिये। उन्होंने अफसरों से कहा कि राज्य में मलेरिया के कुल प्रकरण में से 74 प्रतिशत बस्तर से आते हैं। इसके अलावा यदि गर्भवती महिला को मलेरिया हो जाता है तो यह बाद में एनेमिक में कन्वर्ट होता है और जो बच्चा जन्म लेता है वह कमजोर होता है और यह कमजोरी कुपोषण का रूप लेती है। ऐसे में उन्होंने अफसरों से कहा कि 15 जनवरी से 13 फरवरी तक मलेरिया उन्मूलन के लिए अभियान चलाना है और इसके लिए 1320 टीमें बनाई गई हैं। इसके बाद सिंहदेव ने मेकाॅज के चिल्ड्रन वार्ड और एनआईसीयू का निरीक्षण किया।

सीधे एनआईसीयू पहुंचे और डाॅक्टर से किए सवाल

किसी अफसर के पास मौत रोकने की योजना नहीं
सिंहदेव के साथ स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के अफसरों की पूरी फौज मौजूद थी। मंत्री के दौरे को देखते हुए 6 जिलों के कलेक्टर, कमिश्नर अमृत खलखो, स्वास्थ्य संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला, डीएमई एसएन आदिले, स्वास्थ्य विभाग की सचिव निहारिका बारीक सहित अन्य डॉक्टर मौजूद थे। लेकिन बच्चों की मौतों को रोकने के लिए कोई प्लान किसी के पास नजर नहीं आया।

‘महारानी’ में फिजियोथेरेपी के साथ और भी बहुत कुछ

इधर बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव मेडिकल कॉलेज की विजिट के बाद महारानी हास्पिटल भी पहुंचे। यहां फिजियोथेरेपी सेंटर, योग, नाक, कान, गला, आंख के अलावा आयुर्वेदिक ओपीडी का शुभारंभ किया। इसके अलावा बहरे मरीजों के कान की जांच के लिए बनाये गये साउंड प्रूफ रूम का उद्धघाटन भी किया।

रेडियाेलाॅजिस्ट नहीं, सीटी स्कैन की सुविधा बंद

मेडिकल कॉलेज में रेडियोलाजिस्ट नहीं होने की वजह एक बार फिर से सीटी स्केन की जांच बंद हो गई है। बताया जा रहा है कि जिस रेडियालॉजिस्ट को यहां लाया गया था उन्होंने नौकरी छोड़ दी है। ऐसे में अब मेकाॅज में सीटी स्केन मशीन तो है लेकिन स्केनिंग के बाद रिपोर्टिँग करने के लिए कोई रेडियालॉजिस्ट नहीं है। रिपोर्टिँग नहीं होने की वजह से अभी जांच को बंद रखा गया है।

मौत से लेकर सोनोग्राफी नहीं होने के खुलासे भास्कर लगातार कर रहा

भास्कर पिछले तीन दिनों से लगातार मासूमों की मौत के संबंध में खुलासा कर रहा है सबसे पहले 8 जनवरी को आठ सौ मासूमों की मौत का खुलासा किया। इसके बाद गर्भवती महिलाओं के सोनोग्राफी नहीं होने और आरसीएच रजिस्टर में फर्जी इंट्री का खुलासा किया। इसके बाद 10 जनवरी को मरने वाले आठ सौ में से तीन सौ से ज्यादा बच्चों के बस्तर जिले के होने का खुलासा किया गया।

खास बातचीत

डाॅक्टरों की कमी और बच्चों की मौत अलग-अलग मामला

बाबा के मेकाॅज दौरे के दौरान भास्कर के रिपोर्टर मोहम्मद इमरान नेवी ने बच्चों की मौतों से लेकर वर्तमान स्थिति को लेकर खास बातचीत की। जानें स्वास्थ्य मंत्री ने सेहत से जुड़े सवालों का क्या जवाब दिया…

सवाल : बच्चों की मौत हो रही है डाॅक्टरों और संसाधनों की भारी कमी है।
जवाब : बच्चों की मौत और डाॅक्टर की कमी दोनों अलग-अलग विषय है, यहां पर्याप्त संख्या में पीडियाट्रिक हैं।
सवाल : बच्चों की मौतें हो रही हैं इसे रोकना तो पड़ेगा सारे विषय एक साथ जुड़े हुए हैं।
जवाब : नये सिरे से प्लानिंग कर रहे हैं जिला स्तर पर ही बच्चों को सेटल करने कहा जा रहा है, पहले की तुलना में शिशु म़ृत्यू दर कम हुई है इसे और कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
सवाल : डाॅक्टरों की संख्या जरूरत है स्टाफ भी बेहद कम है।
जवाब : डाॅक्टरों की कमी तो है लेकिन अभी नई भर्तियों और नियुक्तियों में फायनेंस से दिक्कत है आप समझ सकते हैं।
सवाल : सफाई कर्मचारी भी वेतन नहीं मिलने से काम नहीं कर रहे हैं इनकी संख्या भी कम है।
जवाब : अभी तीन महीने की सैलरी रिलीज कर दी गई है बाकि सैलरी भी जल्द दे दी जाएगी। सफाई कामगारों की संख्या बढ़ाना अभी संभव नहीं है।