Madhya Pradesh Assembly : देर रात राज्‍यपाल से मुलाकात के बाद सीएम कमलनाथ बोले स्‍पीकर लेंगे फ्लोर टेस्ट का फैसला

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भोपाल । Madhya Pradesh Assembly सोमवार से शुरू हो रहे मप्र विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन कमलनाथ सरकार का फ्लोर टेस्ट (शक्ति परीक्षण) होगा या नहीं, इसे लेकर संशय पैदा हो गया है। फ्लोर टेस्ट नहीं कराए जाने पर राजभवन और कमलनाथ सरकार में टकराव बढ़ सकता है। रविवार देर रात राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को राजभवन बुलाया। लगभग आधे घंटे की मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री राजभवन से निकले और मीडिया से कहा कि फ्लोर टेस्ट का फैसला स्पीकर लेंगे। कमलनाथ ने कहा विधानसभा कैसे चलेगी यह स्पीकर तय करेगा। कार्यसूची मैं नहीं बनाता, विधानसभा कैसे चलेगी स्पीकर का अधिकार क्षेत्र है। राजभवन के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री को इस संबंध में अवगत करा दिया गया है कि संविधान की मर्यादा बनी रहे। राजभवन भी यही चाहता है।

कांग्रेस द्वारा बजट सत्र के पहले दिन फ्लोर टेस्ट ना कराए जाने के तमाम प्रयासों के बीच राज्यपाल लालजी टंडन ने रविवार की मध्य रात्रि में मुख्यमंत्री कमलनाथ को राजभवन तलब किया। दोनों नेताओं के बीच करीब 1 घंटे तक चर्चा चलती रही। मुलाकात के बाद राजभवन के बाहर मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि फ्लोर टेस्ट के लिए वह तैयार हैं। फ्लोर टेस्ट कैसे हो क्या देखने का काम स्पीकर का है वह इस संबंध में वह सुबह स्पीकर से चर्चा करेंगे। फ्लोर टेस्ट कैसे होगा इसका फैसला विधानसभा अध्यक्ष करेंगे। यह उनका काम है, मैं अपना काम कर रहा हूं।

उन्होंने यह भी बताया कि राज्यपाल टंडन का फोन आया था इसलिए मैं उनसे मिलने आया हूं। विधानसभा शांति से कैसे चले इसके बारे में राज्यपाल से चर्चा हुई। उन्होंने दावा किया कि मेरी सरकार को कोई खतरा नहीं है। मैं फ्लोर टेस्ट के लिए पूरी तरह तैयार हूं। इस संबंध में मैंने राज्यपाल को लिखित पत्र भी दिया था। फ्लोर टेस्ट का कार्य सूची में जिक्र ना होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह देखने का काम स्पीकर का है मेरा नहीं। मैं अपना काम देखता हूं।

सुबह 11 बजे सत्र की शुरुआत राज्यपाल लालजी टंडन के अभिभाषण से होगी। राज्यपाल के निर्देश के मुताबिक उनके अभिभाषण के ठीक बाद कमलनाथ सरकार को सदन में बहुमत साबित करना पड़ेगा। 22 विधायकों के इस्तीफों के बाद पैदा हुए सियासी संकट का संज्ञान लेते हुए राज्यपाल ने शनिवार आधी रात को मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर कहा था कि उन्हें पूरी तरह भरोसा हो गया है कि सरकार अल्पमत में है, उसे सदन में विश्वास मत हासिल करना होगा। इस निर्देश के बाद रविवार को भोपाल से दिल्ली तक चले सियासी दांव-पेच से फ्लोर टेस्ट उलझता दिख रहा है।

कोरोना वायरस का खतरा जताकर फ्लोर टेस्ट टाले जाने की आशंका बढ़ गई है। उधर, विधानसभा सचिवालय की ओर से बजट सत्र के पहले दिन की जो कार्यसूची जारी की गई, उसमें राज्यपाल का अभिभाषण और उस पर कृतज्ञता प्रस्ताव को ही सदन की कार्यवाही में शामिल किया है। इसमें फ्लोर टेस्ट का उल्लेख नहीं है।

विस सचिवालय को फ्लोर टेस्ट की सूचना नहीं

विधानसभा सचिवालय अब तक फ्लोर टेस्ट कराए जाने की खबर से अनभिज्ञ है। विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बताया कि फ्लोर टेस्ट यानी विश्वास मत हासिल करने का प्रस्ताव सदन के नेता द्वारा लाया जाता है तो परंपराओं के तहत कम से कम एक दिन पहले उसकी सूचना विधानसभा को दी जाती है। रविवार की शाम तक विधानसभा को यह सूचना नहीं मिली है। हालांकि, सिंह ने कहा कि सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में भी इसकी सूचना दी जा सकती है, जिससे सदन की कार्यवाही में उसे शामिल किया जा सके।

फ्लोर टेस्ट का फैसला सदन करेगा-प्रजापति

राज्यपाल द्वारा दिए गए फ्लोर टेस्ट के निर्देशों पर विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति चुप्पी साधे हैं। प्रजापति ने मीडिया से कहा कि फ्लोर टेस्ट का फैसला सदन ही करेगा। सदन क्या फैसला लेगा, यह काल्पनिक सवाल है। जब उनसे पूछा गया कि राज्यपाल के निर्देश पर फ्लोर टेस्ट होगा या नहीं, जवाब में स्पीकर ने इसे भी काल्पनिक सवाल बताकर टाल दिया।

रजिस्टर में एंट्री से होगा मतदान

विस के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बताया कि फ्लोर टेस्ट की स्थिति में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम से मतदान नहीं होगा, क्योंकि यह व्यवस्था मध्यप्रदेश विधानसभा में उपलब्ध नहीं है। मतदान के लिए रजिस्टर में विधायकों से एंट्री कराई जाएगी। दाईं और बाईं तरफ की लॉबी में सरकार के पक्ष और सरकार के विपक्ष के विधायकों की एंट्री का सिस्टम रखा जाएगा। इस मसले पर राज्यपाल ने विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह को तलब कर इलेक्ट्रानिक वोटिंग सिस्टम से वोटिंग कराने के निर्देश दिए थे।

भाजपा ने ली कानूनी सलाह

रविवार को भाजपा नेता मप्र में छाए में सियासी संकट को लेकर कानूनी संभावनाएं तलाशते रहे। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, धर्मेंद्र प्रधान, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सुप्रीम कोर्ट के सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता से दो घंटे चर्चा की। उन्होंने मप्र में राज्यपाल के निर्देश के बाद भी फ्लोर टेस्ट न कराए जाने की स्थिति में कानूनी सलाह ली। कांग्रेस इस दौरान किन-किन कानूनी दांव-पेच का सहारा ले सकती है, इस पर भी चर्चा की।

गृहमंत्री शाह के घर बैठक

मप्र के घटनाक्रम से जुड़े भाजपा के सभी प्रमुख नेताओं ने रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के निवास पर महत्वपूर्ण बैठक कर संवैधानिक संकट पर बातचीत कर आगे की रणनीति तैयार की। भोपाल में भाजपा विधायक दल ने व्हिप भी जारी कर दिया, ताकि कोई विधायक फ्लोर टेस्ट में गड़बड़ न कर सके। कांग्रेस शनिवार को व्हिप जारी कर चुकी है।

सभा पर रोक लगाई

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल ने एक आदेश निकालकर 20 से अधिक लोगों की सभाओं के आयोजन पर रोक लगा दी। इसके लिए कानूनी कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए है। सरकार के इस फरमान से आशंका बढ़ गई है कि विधानसभा का सत्र भी टाला जा सकता है।

कांग्रेस विधायकों के लौटने पर हुई कोरोना की जांच

रविवार सुबह कांग्रेस के 82 विधायकों को जयपुर से विशेष विमान से भोपाल के राजा भोज विमानतल पर लाया गया। लौटने पर सभी की कोरोना वायरस की जांच की गई। शाम को मुख्यमंत्री निवास में विधायक दल की बैठक भी हुई, जिसमें पार्टी ने सदन की रणनीति से विधायकों को अवगत कराया। इससे पहले कमलनाथ सरकार की कैबिनेट की बैठक भी हुई। कैबिनेट ने कोरोना के संभावित खतरे और उससे निपटने के उपाय पर चर्चा की।

सीएम ने फिर कहा, बंधक विधायकों के स्वतंत्र होने के बाद फ्लोर टेस्ट

मुख्यमंत्री कमलनाथ लगातार यह कहते आ रहे हैं कि वे फ्लोर टेस्ट को तैयार हैं, लेकिन जब तक बेंगलुरु में बंधक उनके विधायकों को स्वतंत्र नहीं किया जाता, तब तक फ्लोर टेस्ट नहीं हो सकता। इस बात को आज भी उन्होंने दोहराया है। वे कह रहे हैं कि उनके विधायकों के जो इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए हैं, उनकी पुष्टि के लिए विधानसभा अध्यक्ष के सामने विधायकों को पेश होना जरूरी है। इस्तीफों को लेकर प्रलोभन या दबाव जैसी परिस्थितियां को लेकर जब तक विधानसभा अध्यक्ष संतुष्ट नहीं हो जाते, तब तक उनकी प्रमाणिकता साबित नहीं होगी। इसके बिना फ्लोर टेस्ट का कोई मतलब नहीं है। वे रविवार को भी अपनी सरकार की मजबूती के मुद्दे पर आश्वस्त नजर आए।

विस की दलीय स्थिति

कुल विधायक

230

प्रभावी सदस्य संख्या

222

कांग्रेस

108

भाजपा

107

बसपा

02

सपा

01

निर्दलीय

04

रिक्त

08

अब क्या हैं संभावनाएं

– राज्यपाल का अभिभाषण और कृतज्ञता ज्ञापन पर चर्चा करवाकर विधानसभा की कार्यवाही स्थगित की जा सकती है।

– राज्यपाल के निर्देश पर फ्लोर टेस्ट नहीं कराने के खिलाफ भाजपा सुप्रीम कोर्ट जा सकती है।

– राज्यपाल पुन: बैठक बुलाने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ को विश्वास मत हासिल करने के निर्देश दे सकते हैं।

– कमलनाथ सरकार विधायकों के इस्तीफे को लेकर उन्हें स्वतंत्र कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दे सकती है।

– स्पीकर विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार कर सकते हैं या फिर इन्हें खारिज भी किया जा सकता है।

– कुछ भाजपा विधायकों को निलंबित करके फ्लोर टेस्ट करवाया जा सकता है।

– कांग्रेस विधायक सदन में हंगामा करके कार्यवाही बाधित कर सकते हैं।