कर्नाटक उपचुनाव रिजल्ट: 3 संभावित समीकरण जो तय करेंगे सियासी तकदीर

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कर्नाटक में 15 सीटों पर हुए उपचुनाव में वोटों की गिनती जारी है और नतीजे राज्य की बीजेपी सरकार का भविष्य तय करेंगे। सीएम बीएस येदियुरप्पा के राजनीतिक करियर के लिए उपचुनाव के परिणाम काफी अहम हैं। दूसरी ओर कांग्रेस और जेडीएस के लिए भी यह उपचुनाव एक मौके की तरह है। अगर दोनों को मिलाकर 10 सीटें भी मिल जाती हैं तो एक बार फिर दोनों के पास बीजेपी को पछाड़ने का सुनहरा मौका होगा। एक नजर तीन संभावित समीकरणों पर:

सभी कॉमेंट्स देखैंअपना कॉमेंट लिखें1. तो सीएम येदियुरप्पा को मिलेंगे 3.5 साल और
अगर बीजेपी कम से कम छह सीटें जीत जाती है तो राज्य में 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद से चल रही राजनीतिक अनिश्चितता पर ब्रेक लग जाएगा। अगर ऐसा होता है तो येदियुरप्पा के बतौर सीएम चार साल के कार्यकाल का रास्ता साफ हो जाएगा। यह उनके चार कार्यकालों में सबसे लंबा होगा। इसके साथ ही 75 साल की उम्र (बीजेपी में रिटायरमेंट की उम्र) पार करने के बावजूद पार्टी में उनके सक्रिय रहने की उम्मीदें भी बढ़ जाएंगी। अयोग्य ठहराए गए विधायकों को मंत्री पद का इनाम दिया जा सकता है लेकिन जो अयोग्य एमएलए हार जाएंगे उनका भविष्य क्या होगा यह अभी साफ नहीं है।

अगर बीजेपी छह से कम सीटें जीतती है तो कांग्रेस-जेडीएस के पास अलायंस करने का फिर मौका होगा। इससे येदियुरप्पा के राजनीतिक करियर पर विराम लग सकता है और उन 13 अयोग्य विधायकों का भी राजनीतिक भविष्य अनिश्चितता में घिर जाएगा जो बीजेपी के टिकट पर चुनाव में उतरे हैं। दोनों विपक्षी पार्टियों की जीत का अर्थ यह होगा कि ‘ऑपरेशन लोटस’ नाकाम रहा। इसके साथ ही बीजेपी येदियुरप्पा को हटाकर किसी दूसरे नेता को आगे करने में जुट जाएगी। अगर बीजेपी को शिकस्त मिलती है तो सिद्धारमैया और मजबूत हो जाएंगे लेकिन ऐसी संभावना है कि अगर कांग्रेस आलाकमान जेडीएस के साथ गठबंधन का फैसला करता है तो उनको किनारे कर दिया जाए। ऐसे में जेडीएस को ज्यादातर कैबिनेट मंत्रालय मिल सकते हैं लेकिन सीएम की कुर्सी मिलने की कम संभावना है।

एक और संभावना यह है कि अगर बीजेपी जरूरी छह सीटें नहीं जीत पाती है तो राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने के आसार हैं। ऐसे में जेडीएस और कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों के इस्तीफे देखने को मिल सकते हैं। इसके साथ ही पूर्व सीएम कुमारस्वामी की अगुआई में जेडीएस बीजेपी को बाहर से समर्थन दे सकती है या फिर बीजेपी नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा बनते हुए सरकार में शामिल हो सकती है। दूसरी ओर बीजेपी आलाकमान जेडीएस के समर्थन का ऑफर ठुकरा सकता है और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने के साथ ही मध्यावधि चुनाव की संभावना बन सकती है।