मानकों को ताक पर रख बनाए गए शीतगृह

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कन्नौज : आलू उत्पादक क्षेत्र में जाहिर है कि भंडारण के लिए शीतगृह भी अधिक होंगे। जिले में आलू बेल्ट होने के कारण 126 शीतगृह हैं, जिनमें हर साल हजारों मीट्रिक टन आलू को भंडारित किया जाता है। यहां सबसे विशेष बात यह है कि शीतगृहों को मनमाने ढंग से बनवाया गया है और मानकों व सुरक्षा प्रबंधों की जमकर अनदेखी की गई है।

अनौगी में निर्माणाधीन कोल्ड स्टोर की दीवार ढहने से हुई दो मजदूरों की मौत के बाद अब सवाल खड़ा हो गया है कि किस कारण यह हादसा हुआ। निर्माण से लेकर शुरू होने तक उद्यान विभाग और लोक निर्माण विभाग कई चरणों में जांच करते हैं। इसके बाद उसे हरी झंडी दी जाती है। जिले में शायद ही कोई शीतगृह ऐसा होगा, जहां सभी नियमों और मानकों का पालन किया गया हो। तैयार शीतगृहों में क्षमता से अधिक भंडारण हो रहा है और जिले में अमोनिया गैस के रिसाव को रोकने के कोई इंतजाम भी नहीं हैं। बिना देखे मिल जाती एनओसी

नेशनल बिल्डिग कोड 2005 के मानकों के अनुसार कोल्ड निर्माण का प्रावधान है। 90 फीसद निर्माण के बाद भवन की जांच लोक निर्माण विभाग से कराई जाती है। पीडब्ल्यूडी की जांच टीम कोल्ड की सड़क से दूरी, भूकंप रहित इमारत, बीम, नींव, आरसीसी, भवन का नक्शा, सुरक्षा के इंतजाम आदि की पड़ताल करती है। इसके बाद पीडब्ल्यूडी एनओसी जारी करता है। अधिकारी बिना देखे ही एनओसी दे देते हैं। नहीं हो रही मॉनीटरिग

शीतगृह की मियाद 80 साल होती है। हर साल उद्यान विभाग व पीडब्ल्यूडी को इसकी मॉनीटरिग कर भौतिक सत्यापन करना होता है। जिले में यह कार्य नहीं हो रहा है। हादसा होने पर कोल्ड प्रबंधन जिम्मेदार होता है। कोल्ड स्टोरेज विनिमियन अधिनियम 1976 के तहत छह व एक वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की सजा है। अर्थदंड का भी प्रावधान हैं। इसके आलावा कोल्ड का लाइसेंस रद भी किया जाता है। यह है शीतगृहों के मानक

नींव : ओपन डीप फाउंडेशन (आरसीसी)

स्ट्रॅक्चर : आरसीसी कालम फ्रेम्ड स्ट्रॅक्चर

छत : कॉडकोर आरसीसी रूफ

फर्श : सीमेंट कंक्रीट

पिलर : सरिया बेस्ड पिलर

दूरी : आबादी क्षेत्र से एक किमी

(स्त्रोत : नेशनल बिल्डिग कोड 2005) सभी शीतगृहों की पीडब्ल्यूडी या राजकीय निर्माण निगम के इंजीनियरों से जांच कराई जाएगी। जहां मानकों और सुरक्षा प्रबंधों की अनदेखी मिलेगी, उन पर कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में जिला उद्यान अधिकारी से भी स्पष्टीकरण तलब किया गया है।

-रवींद्र कुमार, जिलाधिकारी