Chhattisgarh : देश में कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़, असंतुष्ट विधायक कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं

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रायपुर । संख्या बल के लिहाज से देश में इस वक्त छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार सबसे सुरक्षित है। 90 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 69 विधायक हैं। इसी वजह से यह कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ माना जा रहा है। कांग्रेस के लिए यहां बड़ा बहुमत ही बड़ी चुनौती है। सरकार बनने के करीब 15 महीने बाद भी कुछ चुनिंदा निगम- मंडलों को छोड़कर किसी में भी नियुक्ति नहीं हो पाई है। इतना ही नहीं पार्टी के संगठन का विस्तार भी अटका है।

प्रदेश में कोई बड़ा क्षत्रप नहीं

प्रदेश में कांग्रेस के लिए राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि यहां कोई बड़ा राजनीतिक क्षत्रप नहीं है। 2013 में हुई झीरमघाटी की घटना में कांग्रेस के अग्रिम पंक्ति के ज्यादातर नेता नक्सली हमले का शिकार हो गए। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का बड़ा खेमा था, लेकिन अब वे पार्टी से बाहर हैं।

कभी जोगी के करीब रहे अब सत्ता के खास

स्पष्ट बहुमत के बावजूद कांग्रेस को अनहोनी की आशंका थी। इसी वजह से विधायक बने हर एक नेता को साधने की कोशिश की गई। इसी के तहत कभी पूर्व मुख्यमंत्री जोगी के बेहद करीबी रहे चार से अधिक विधायकों को सरकार में स्थान दिया गया है।

नाराजगी, लेकिन कुछ करने की स्थिति नहीं

कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा पहुंचने वालों में कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं। इनमें आधा दर्जन से अधिक मंत्री पद के दावेदार हैं, लेकिन उन्हें पद नहीं मिला है। इससे दुखी कई विधायक अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर चुके हैं। इसके बावजूद वे कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं हैं।

असंतोष के डर से नहीं हो पा रही नियुक्ति

दिसंबर 2018 में सरकार गठन के बाद से पार्टी के नेता निगम-मंडल में कुर्सी का इंतजार कर रहे हैं। पहले लोकसभा चुनाव की वजह से यह नियुक्ति रोकी गई, फिर निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के कारण। इसके पीछे पार्टी संगठन का तर्क था कि कुर्सी नहीं मिलने से असंतोष के साथ भितरघात का खतरा बढ़ जाएगा।

सबसे बड़ा खिलाड़ी कांग्रेस से बाहर

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को तोड़फोड़ की सियासत का सबसे माहिर खिलाड़ी माना जाता है। राज्य के पहले मुख्यमंत्री रहे जोगी के कार्यकाल में भाजपा के 13 विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे। 2003 में कांग्रेस के सत्ता से बाहर होने के बाद भी जोगी भाजपा में तोड़फोड़ के आरोप लगे थे। जोगी अब कांग्रेस से बाहर हैं। उन्होंने अपनी अलग पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) बना ली है।

छत्तीसगढ़ के कारण बदला दलबदल कानून

छत्तीसगढ़ में 2001-02 में हुए दलबदल के बाद केंद्र की तत्कालीन एनडीए सरकार ने 91वां संशोधन (2003) किया। इसमें दल बदल व्यवस्था में संशोधन, केवल पूरे दल के विलय को मान्यता, केंद्र और राज्य में मंत्रिपरिषद के सदस्य संख्या क्रमश: लोक सभा और विधान सभा की सदस्य संख्या का 15 प्रतिशत किया गया।

दलीय स्थिति

90 कुल सदस्य

46 है बहुमत का आंकड़ा

69 कांग्रेस

14 भाजपा

02 बसपा

05 जकांछ