CG Budget 2020 : छत्तीसगढ़ में बिना चर्चा के एक लाख करोड़ से अधिक का बजट पास

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रायपुर। छत्तीसगढ़ का वित्तीय वर्ष 2020- 21 का करीब एक लाख करोड़ रुपए से अधिक का बजट गुरुवार को विधानसभा ने पारित कर दिया। राज्य के इतिहास में पहली बार बजट बिना चर्चा के गिलोटिन के माध्यम से पास किया गया। सदन ने राज्य के दो विश्वविद्यालयों के नाम बदलने समेत 28 विधेयकों को भी मंजूरी दी। इस दौरान प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा के सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। विधेयकों को बिना चर्चा के पास किए जाने के विरोध वे वाकआउट कर गए थे। करीब पौने दो घंटे की बैठक के बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। सदन की कार्यवाही के संबंध में संसदीय कार्यमंत्री रविंद्र चौबे ने बताया कि बजट से संबंधित सभी प्रस्ताव सदन में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रखा था। इसे सदन ने गिलोटिन के जरिये पारित कर दिया।

क्या होता है गिलोटिन?

विभागों को आवंटित बजट पर सदन में चर्चा होती है। इसके बाद उसे सदन पास करता है। यह सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन किसी कारण ऐसा नहीं हो पाता। ऐसे में जिन मांगों पर चर्चा नहीं हो पाती है उसे बिना चर्चा के ही मतदान कराकर पास कर दिया जाता है। इसी प्रक्रिया को गिलोटिन कहते हैं।

सदन में कार्यमंत्रणा समिति के प्रस्ताव पर पहली बार मतदान

छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को पहली बार कार्यमंत्रणा समिति के प्रस्ताव पर मतदान हुआ। सदन में प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा ने कार्यसूची में गैर वित्तीय (विधायी) कार्यों को शामिल किए जाने का विरोध करते हुए मत विभाजन की मांग की। हालांकि 57 के मुकाबले 14 वोट से उनका प्रस्ताव गिर गया। इसके बाद भाजपा के सभी सदस्यों ने सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए सदन से वाकआउट कर दिया। भाजपा के सदस्यों ने बताया कि गुरुवार की सुबह कार्यमंत्रणा समिति की बैठक के समय कार्यसूची को संशोधित कर उसमें 28 विधेयकों को जोड़ दिया, जबकि कोरोना के खतरे को देखते हुए सदन में केवल वित्तीय कार्य (बजट) होना था।

भाजपा के विधायकों ने कहा कि वित्तीय कार्य जस्र्री है, इसलिए सरकार बिना चर्चा के उसे पास करा ले, लेकिन विधेयकों को बिना चर्चा के कैसे पास करना उचित नहीं है। संसदीय कार्यमंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि दरअसल भाजपा के सदस्य नहीं चाह रहे थे कि विश्वविद्यालयों का नाम बदले जाने के दौरान चर्चा में शामिल होंगे। उनकी इच्छा थी कि सरकार काम बिल के जरिये कर ले। लेकिन इसकी प्रक्रिया लंबी है। सरकारी धन और समय बचाने के इरादे से ऐसा किया गया। वहीं नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने सदन के बाहर पत्रकारों से चर्चा में कहा कि विधानसभा का संचालन नियम और प्रक्रियाओं से चलता है, लेकिन सरकार ने नई कार्यप्रणाली शुरू कर दी है, जो परंपराएं सबने मिलकर बनाई थीं, वह अब टूटती जा रही हैं। विपक्ष चाहता था कि आने वाले वक्त में राज्य की आर्थिक स्थिति प्रभावित न हो, लेकिन कार्यसूची में संशोधन कर विधेयकों को शामिल कर दिया गया है। सरकार ने खुद आज विधानसभा के नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं। संसदीय परंपराओं को आगे बढ़ाने की बात होती है, लेकिन इसे तोड़ने की कोशिश की जा रही है, यह चिंता की बात है।