कैबिनेट मीटिंग में छाया विधायकों की खरीद-फरोख्त का मुद्दा, सीएम कमलनाथ ने कहा-अलर्ट रहो

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भोपाल । कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को विधायकों की खरीद-फरोख्त के मुद्दे पर लंबी चर्चा चली। अनौपचारिक चर्चा के दौरान मंत्रियों ने विधायकों की खरीद-फरोख्त के सामने आ रहे बयानों पर मुख्यमंत्री कमलनाथ का ध्यान आकर्षित किया। मंत्रियों ने कहा कि ऐसे बयान आ रहे हैं, ऐसे में क्या किया जाना चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को अलर्ट रहने को कहा। उन्होंने कहा कि अपने विधायकों के संपर्क में रहो और विरोधियों को कड़ा जवाब देने के लिए भी तैयार रहो। मंत्रियों ने राज्यसभा चुनाव और विधानसभा सत्र शुरू होने से ठीक पहले सामने आ रहे इन बयानों को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में क्या किया जाना चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री नाथ ने मंत्रियों को अलर्ट रहने के साथ भाजपा के आरोपों का कड़ाई से जवाब देने को कहा है। उन्होंने कहा कि प्रभार के जिलों में सक्रियता बढ़ाएं और अपने खेमे के सभी विधायकों से संपर्क में रहें। यह सक्रियता विधानसभा सत्र के दौरान बनी रहे। नाथ ने कहा कि कई तरह के फीडबैक हमारे पास भी आ रहे हैं। सीएम ने कहा कि नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव के मद्देनजर सक्रियता में कोताही न बरतें और कर्जमाफी को लेकर भाजपा के प्रपंच का पुरजोर तरीके से विरोध करें। जनता के बीच जाकर बताएं कि सरकार ने कर्जमाफी को लेकर क्या कदम उठाए हैं।

इतना क्यों बढ़ा रहे : विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का स्वेच्छानुदान दोगुना करने के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने चौंककर कहा कि इतना क्यों बढ़ा रहे हैं। इस पर वित्त विभाग के अफसरों ने कहा कैबिनेट और राज्यमंत्रियों के स्वेच्छानुदान में की गई वृद्धि के अनुपात में ही बढ़ाया जा रहा है।

समिति करेगी फैसला : चिकित्सा शिक्षा विभाग ने एक्स एजेंडे में निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी अस्पतालों से जोड़ने का प्रस्ताव रखा। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे क्यों ला रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि विभाग के अफसरों ने बताया कि निजी मेडिकल कॉलेज संचालकों ने बड़ी अधोसंरचना तैयार की है। सरकारी अस्पतालों से जोड़कर उसका उपयोग किया जा सकता है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन कॉलेजों में बच्चे तो हैं नहीं। फिर किसे और कैसे फायदा मिलेगा। इस प्रस्ताव पर विचार करना जरूरी है। इसलिए मंत्रिपरिषद की एक कमेटी बनाकर उससे रिपोर्ट ले लेते हैं। यह कमेटी कॉलेज संचालक और विद्यार्थियों से भी बात करेगी। राजनीतिक दलों, चैरिटेबल ट्रस्टों को दी जाने वाली सरकारी जमीन के नियमों में बदलाव का निर्णय कमेटी करेगी।

रेरा और विद्युत नियामक बोर्ड के अध्यक्ष को हाईकोर्ट के जज के समान जीवन पर्यंत सुविधाएं देने का प्रस्ताव कैबिनेट ने फिलहाल टाल दिया है। चर्चा के लिए आए इस प्रस्ताव पर सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने आपत्ति ली तो अन्य मंत्री भी इसके विपक्ष में खड़े हो गए। इस पर मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव को अगली कैबिनेट बैठक में रखने को कहा है। वहीं राम वनगमन पथ का प्रस्ताव भी फिलहाल रोक दिया गया है।