21 साल की लक्षिका बन गई सरपंच

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न्यूज एंकर और रेडियो जॉकी से तय किया सरपंची का सफर

उज्जैन। मध्यप्रदेश में ग्राम पंचायत के लिए पहले चरण की वोटिंग खत्म हो गई है। मतों गणना शुरू हो गई है। अघोषित रूप से उम्मीदवारों को परिणाम पता चलने लगा है। उज्जैन एक ग्राम पंचायत से लक्षिका डागर सबसे कम उम्र में सरपंच बनी है।
न्यूज एंकर, रेडियो जॉकी और अब लक्षिका डागर सरपंच बन गई है। 21 साल की उम्र लक्षिका डागर ने सरपंच बनकर सबसे कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल की है। लक्षिका को यह तोहफा 26 जून को मिला है। 27 जून को बर्थडे है। इसके बाद लक्षिका डागर 22 साल की हो जाएगी। सरपंच चुनाव में जीत के बाद लक्षिका और उसके परिवार के लोग काफी उत्साहित हैं। चिंतामन जवासिया ग्राम की वह सरपंच बनी है। जीत के बात लक्षिका डागर ने कहा है कि पंचायत के लोगों ने मेरे ऊपर भरोसा किया है। एक पढ़ी-लिखी लड़की पर लोगों ने भरोसा किया है। मैं उनकी उम्मदों खरा उतरने की कोशिश करूंगी।
कौन है लक्षिका डागर
एमपी ग्राम पंचायत चुनाव में इस बार कई पढ़ी-लिखी लड़कियां सरपंच चुनाव लड़ रही हैं। कुछ तो निर्विरोध चुनाव जीत गई हैं। 25 जून को पहले चरण की वोटिंग खत्म होने के बाद मतों की गणना शुरू हो गई। 26 जून को अघोषित परिणाम आए तो लक्षिका ने विजयी हासिल की है। लक्षिका सरपंच बनने से पहले स्थानीय चैनल में न्यूज एंकर और रेडियो जॉकी भी रही है। चिंतामन जवासिया ग्राम पंचायत में सरपंच पद के लिए आठ महिला उम्मीदवार थीं, उन सबों को पछाड़कर लक्षिका डागर ने जीत हासिल की है। इसके बाद गांव-घर में जश्न का माहौल है।
487 वोटों से लक्षिका डागर ने चुनाव जीती
चिंतामन जवासिया ग्राम में चुनाव लड़ रहीं सरपंच उम्मीदवारों में लक्षिका डागर की उम्र सबसे कम थी। कुल आठ महिलाओं ने सरपंच पद के लिए पर्चा दाखिल किया था। लक्षिका ने सभी उम्मीदवारों को हराकर 487 मतों से जीत हासिल की है। सरपंच बनी लक्षिका ने बहुत दिनों तक पत्रकारिता की है। उसने जनसंचार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा की है। उज्जैन से संचालित एक एफएम चैनल में लक्षिका डागर रेडियो जॉकी भी है। इससे पहले एक चैनल में वह न्यूज एंकरिग करती थी। इसकी वजह से लक्षिका ने कम उम्र में ही जिले में ये एक अलग पहचान बनाई है।
गांव का विकास करना है लक्ष्य
लक्षिका डागर चुनाव जीत गई। उसने अपने क्षेत्र के लोगों से वादा किया है कि मेरा उदेश्य गांव के विकास के लिए काम करना है। गांव में पेयजल, नाली और स्ट्रीट लाइट की समस्या को हल करना है। उन्होंने कहा कि मैं सबसे कम उम्र की युवा सरपंच बनने जा रही हूं, इस बात की मुझे बहुत खुशी है। मैं चाहती हूं कि गांव में अच्छा विकास हो। मैं सभी की समस्याओं को सुलझा सकूं यही उम्मीद है।
27 जून को 22 साल की हो गईं लक्षिका
सरपंच बनने के लिए अगले ही दिन लक्षिका डागर 22 साल की हो गई है। लक्षिका डागर के लिए जीत की खुशी आज दोगुनी हो गई है। उज्जैन शहर से 10 किमी दूर लक्षिका के गांव चिंतामन जवासिया में जश्न का माहौल है। पंचायत के लोगों का मानना है कि हमें लंबे समय बाद कोई युवा सरपंच मिली है। ऐसे में विकास को लेकर उम्मीदें भी बहुत हैं।
परिवार से भी मिला सपोर्ट
यह पंचायत महिलाओं के लिए रिजर्व है। लक्षिका डागर ने जब चुनाव लड़ने का फैसला किया तो परिवार से भी खूब सपोर्ट मिला। लक्षिका के पिता दिलीप डागर सहकारी केंद्रीय बैंक भरतपुरी में रीजनल अधिकारी के पद पर हैं। महिला के लिए यह सीट रिजर्व होने के बाद ही लक्षिका डागर ने यह फैसला किया था कि गांव के विकास के लिए कार्य करना है। इसके बाद चुनाव लड़ने का फैसला किया।