रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की कर्मचारी भर्ती से जुड़े दस्तावेज जाएंगे विधानसभा

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जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (आरडीयू) की तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती का मामला विधानसभा पहुंच गया है। भर्ती से जुडे समस्त दस्तावेजों को विधानसभा ने तलब किया है। दरअसल इस मामले में विधानसभा में प्रश्न पूछा गया है कि क्या सच में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज गायब हो गए हैं,अगर ऐसा नहीं तो भर्ती से जुडेÞ पूरे दस्तावेजों को प्रस्तुत किया जाए। इस आशय का पत्र प्राप्त होने के बाद से विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। जानकारी के मुताबिक 17 दिसंबर से प्रारंभ हो रहे विधानसभा सत्र में आरडीयू भर्ती मामले से जुड़े प्रश्न भी लगे हैं। विधायक विनय सक्सेना ने आरडीयू से दो प्रश्नों को विधानसभा में रखा है। जिसमें मुख्य रूप से 2014-15 में आरडीयू में निकाली गई तृतीय- चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती से जुड़ी प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत ब्यौरा मांगा गया है। उन्होंने पूछा है कि आखिर किन कारणों के चलते भर्ती प्रक्रिया को आरडीयू कार्य परिषद ने निरस्त किया था। क्या सच में आरडीयू से भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अहम दस्तावेज मूल नस्ती से गायब हैं। उन्होंने विधानसभा में मूल नस्ती भी प्रस्तुत किए जाने की मांग की है। विधायक द्वारा विधानसभा में उठाए गए आरडीयू भर्ती मामले में यह भी पूछा गया है कि कितने कर्मचारियों के रिश्तेदार मैरिट लिस्ट या टॉप टेन में शामिल हैं। उनका आकड़ा भी मांगा गया है। उल्लेखनीय है कि आरडीयू प्रशासन ने अलग-अलग विभागों में रिक्त बताए गए 38 पदों के लिए 2014-15 में भर्ती निकाली थी। जिसकी लिखित परीक्षा के उपरांत जो परिणाम सामने आए उसमें 38 पदों में से ज्यादात्तर की मैरिट सूची में कर्मचारियों के रिश्तेदार के नाम शामिल थे। विधानसभा में सवाल उठने के बाद भर्ती से जुड़े दस्तावेजों का संकलन करने के लिए बकायदा प्रोफेसर अंजना शर्मा एवं प्रो. रामशंकर और डिप्टी रजिस्टार दीपेश मिश्रा की सदस्यता वाली एक कमेटी बनाई गई है। कुल सचिव कार्यालय भी इस मामले में खुद निगाहें रखे हुए है। उक्त कमेटी दस्तावेजों को एकत्रित कर रही है। सबसे मजे की बात तो यह कि विधानसभा प्रश्नों का उत्तर तैयार करने की जिम्मेदारी अघोषित तौर में एक ऐसे कर्मचारी नेता को दी गई है जो पूरे मामले का मुख्य किरदार है।