महापौर समीकरण बता रहा है प्रदेश का मिजाज

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मध्यप्रदेश में नगरी निकाय चुनाव का मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच होता आया है… चार महानगरों का जिक्र करे तो लगातार कांग्रेस को शिकस्त मिलती रही है…ग्वालियर में पिछले 6 दशरथ से कांग्रेस का महापौर प्रत्याशी जीत नहीं पाया, इंदौर में 22 साल, जबलपुर 16 साल से और भोपाल 13 साल कांग्रेस महापौर की कुर्सी से दूर है..
ग्वालियर में छह दशक से भगवा का रंग ऐसा चढ़ा है कि कांग्रेस की लाख कोशिश के बावजूद भी लोगों का मोह भगवा से भग नही नहीं हो रहा है… 58 सालों में 17 महापौर जनता को मिले हैं इस बार बीजेपी का मुकाबला कांग्रेस के विधायक सतीश सिकरवार की पत्नी शोभा सिकरवार से है तो बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की समर्थक सुमन शर्मा पर भरोसा जताया है वही ज्योतिरादित्य सिंधिया को ग्वालियर की जनता ने नकार दिया था पिछले चुनाव में ही ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक मैदान में उतरे लेकिन बीजेपी के मुकाबले में धराशाई हो गए… हालांकि इस बार हर बार की तरह बीजेपी ने मंदिर जाकर भगवान से जीत का आशीर्वाद मांगा है… मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उज्जैन महाकाल दरबार में माथा टेककर नगरी निकाय चुनाव का आशीर्वाद भगवान भोलेनाथ से लिया है ..बीजेपी में दिग्गज एक साथ प्रत्याशी के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं…विकास का मॉडल सामने रखकर जनता के बीच भाजपा जा रही है तो संगठन भी पूरी दमखम के साथ मैदान में है….

.इंदौर में पिछले 22 साल से बीजेपी महापौर पद पर काबिज रही…

. 1995 में कांग्रेस के मध्य पूर्व महापौर थी इसके बाद महापौर सीट कभी भी कांग्रेस के हाथ नहीं आई है…

. कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में मतदाता थे तो जीत लिया लेकिन नगरी निकाय चुनाव में जनता ने कांग्रेस को इस बार चेहरा संघ का है तो वहीं कांग्रेस ने करोड़पति विधायक संजय शुक्ला को मैदान में उतारा…

.भोपाल की महापौर सीट कांग्रेस के लिए राहत वाली है यहां पर सोनू सूद ,विभा पटेल महापौर रह चुके हैं…

. 13 साल से बीजेपी के कब्जे में है कृष्णा गौर फिर आलोक शर्मा ने महापौर की सीट जीती…

.इस बार बीजेपी ने दो बार पार्षद चुनाव हार चुकी मालती राय को प्रत्याशी बनाया ,वहीं कांग्रेस ने पूर्व महापौर विभा पटेल पर फिर से भरोसा जताया…

.जबलपुर में कांग्रेस को 1994 में जीत हासिल हुई थी विश्वनाथ दुबे महापौर चुने गए थे…

.उसके बाद जबलपुर से कांग्रेस का कोई भी महापौर उम्मीदवार नहीं हो पाया…

.जबलपुर से 20 महापौर बन चुके हैं इस बार बीजेपी ने संघ और शिवराज के करीबी जितेंद्र जामदार को मैदान में उतारा है जबकि कांग्रेस से जगत बहादुर सिंह उतरे हैं…

कांग्रेस का फोकस बीजेपी सरकार की कोरोना संक्रमण काल के दौरान असफलता और भ्रष्टाचार के मुद्दों को सड़कों तक ले जाना है कांग्रेस ने महापौर प्रत्याशी पहले घोषित कर दिए थे.. लिहाजा चुनाव प्रचार में भी पार्टी जोरों शोरों से जुट गई है… हालांकि कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है कि दशकों से बीजेपी के महापौर है मगर तमाम समस्या है जिन को लेकर कांग्रेस लोगों के बीच में जाएगी..

नगरी निकाय चुनाव के प्रचार के लिए दोनों की राजनीतिक पार्टी जोर शोर से प्रचार कर रही है.. वही कांग्रेस आम जनता की समस्याओं को उठाकर एक बार फिर महापौर की कुर्सी पर वापस बैठने की कोशिश कर रही है …तो वहीं बीजेपी के तमाम बड़े दिक्कत नेता एकजुट होकर प्रचार करते दिखाई दे रहे हैं …अब देखना होगा कि इस बार प्रदेश की जनता किस पार्टी महापौर की कुर्सी पर बिठाती है.