तिरंगे का अपमान

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भोपाल। देश की आन बान शान तिरंगा सियासत के आगे बेबस है, तिरंगे की शान में जान कुर्बान कर देने का दम भरने वाले नेताओं के राज में ही तिरंगा अपमान के घूंट पीने को मजबूर है।
मध्य प्रदेश की जहां तिरंगे की शान में राजनेता बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं लेकिन ये कहीं किसी को धूप से बचा रहा है तो किसी की जेब में रुमाल बन कर आंसू बहा रहा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान घर-घर तिरंगा अभियान को सुबह में जोर शोर से सफल बनाने के लिए जोर शोर से लगे हुए हैं। शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि भले ही जान चली जाए लेकिन तिरंगे की शान को कुर्बान नहीं होने देंगे।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा साफ हो सकती है. लेकिन तिरंगे की शान को बरकरार रखने के इरादे को उनके ही नीचे काम करने वाले प्रशासनिक अधिकारी की कमजोर आंखों के चलते पलीता लग रहा है.।
यह नजारा है झंडा बिक्री केंद्र का तिरंगे की शान को तार तार करने में लगे हुए हैं…कोई अपने सर को तिरंगे से धड़क रहा है, तो कोई उसे जेब में रख रहा है, मध्यप्रदेश के राजनेता तो ब्रांडिंग करने में माहिर है, तिरंगे के सामने खड़े होकर फोटो खिंचवा कर टि्वटर फेसबुक के प्रोफाइल पर लगा रहे हैं लेकिन यह भूल जाते हैं कि तिरंगे के लिए बाकायदा एक झंडा संहिता है शायद राजनेताओं को मंत्रियों विधायकों या आम जनता को आज भी भारत की आन बान शान के प्रतीक तिरंगे के सम्मान की परवाह नहीं है। यह स्थिति चिकित्सा शिक्षा मंत्री के कार्यक्रम में देखने को मिली है।
बीजेपी और कांग्रेस तिरंगे के सम्मान को लेकर भले अभियान चला ले यात्राएं निकाल लें लेकिन उनकी कथनी और करनी का अंतर तिरंगे के हालात को देखकर साफ हो जाते हैं। दरअसल, तिरंगा राजनीति के लिए सिर्फ सियासत चमकाने का माध्यम रहा है।