कांग्रेस को याद आए आदिवासी

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कमलनाथ पहुंचे पातालपानी

भोपाल, ब्यूरो
विश्व आदिवासी दिवस पर आज कांग्रेस प्रदेश भर में कार्यक्रम आयोजित की है…. वही कांग्रेस विश्व आदिवासी दिवस और भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ पूरे प्रदेश में माना रही है.. जिसके लिए पार्टी के सभी बड़े नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है… क्योंकि 2023 से पहले आदिवासियों पर कांग्रेस का पूरा फोकस बना हुआ है… पूर्व सीएम कमलनाथ भी आज पातालपानी पहुंचे… जहां वे कई कार्यक्रमों में शामिल हुए….
कांग्रेस आज से पूरे प्रदेश में भारत छोड़ो आंदोलन की बरसी से स्वतंत्रता दिवस तक तिरंगा सम्मान महोत्सव और आदिवासी सम्मान उत्सव मना रही है… इसी के तहत कमलनाथ आज भारत छोड़ो आंदोलन की बरसी पर पातालपानी में टंट्या मामा और जानापाव में भगवान परशुराम को प्रणाम करते नजर आ रहे है… 9 से 15 अगस्त हर जिले में तिरंगा यात्रा यात्रा और आदिवासी सम्मान आयोजन कांग्रेस आयोजित किया… जिसमें पार्टी के सभी बडे़ नेता शामिल हो रहे है…वहीं कमलनाथ ने विश्व आदिवासी दिवस पर संदेश देते हुए कहा कि ‘विश्व आदिवासी दिवस की आप सभी को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं, आदिवासी वर्ग हमारी वन संपदा और पर्यावरण के प्रथम प्रहरी के रूप में सदैव जाने जाते है…. आदिवासी वर्ग के उत्थान और उन्हें उनका हक़ दिलाने के लिये कांग्रेस सदैव संकल्पित रही है… आदिवासी वर्ग के सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक हितो की न केवल कांग्रेस संरक्षक रही है बल्कि आदिवासी वर्ग की भलाई के लिये हरसंभव कार्ययोजनाएं भी कांग्रेस सरकारों के समय ही संचालित की गयी, जिससे उनके विकास की नई इबारत लिखी गयी….
2018 के विधानसभा चुनाव के पहले तक आदिवासी वर्ग का झुकाव बीजेपी की तरफ था… लेकिन 2018 के इलेक्शन में पांसा पलट गया और आदिवासियों के लिए आरक्षित 47 सीटों में से 30 सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा केवल 16 सीटें जीत सकी. इसे प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की बड़ी वजह माना गया और प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस की सरकार बनी थी… लेकिन पिछले कुछ समय से बीजेपी ने इसी वर्ग पर फोकस किया है… ऐसे में अब कांग्रेस भी अपने पुराने वोट बैंक को साधने में जुट गई है…. हालांकि कांग्रेस की इस यात्रा को लेकर प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि कमलनाथ के पद यात्रा नाम दिया है और यात्रा कितने पद चलते हैं.. यह देखने वाली बात होगी अध्यक्ष जी 1 किलोमीटर भी चलें तो हमें बताना.. कमलनाथ आदिवासियों के हितेषी होते तो उनके खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव के दौरान वोट नहीं करते.. यह कांग्रेस आदिवासी विरोधी है 15 महीने की कांग्रेस सरकार ने सारी घटनाएं केवल आदिवासी वर्ग के लिए कागजों में ही की थी…
2023 के विधानसभा चुनाव के चलते हैं दोनों राजनीतिक पार्टी अब यात्रा और अभियान के जरिए आदिवासी वोट बैंक को साधने की कोशिश में जुट गई है.. अब देखना होगा कि क्या आदिवासी वोटर किस पार्टी को सत्ता की कुर्सी पर बेठलती है…