आदिवासी बनेंगे सत्ता की कुंजी

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जिसके साथ आदिवासी, सरकार भी उसकी ही बनी। - Dainik Bhaskarभोपाल। 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी से सत्ता छिनने का दावा कर रही कांग्रेस ने अभी से ही जातिगत समीकरण बैठाना शुरू कर दिया है… कांग्रेस की नजर सबसे पहले आदिवासी वोट बैंक पर आ टिकीं है… पार्टी ने आदिवासी बहुल क्षेत्रो में पदयात्रा की रणनीति भी तैयार कर ली है… यात्रा 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस से शुरू होगी… हालांकि, अभी से ही कांग्रेस की पदयात्रा सत्ताधारी दल बीजेपी के निशाने पर आ गई है…

– साल 2023 आने में भले ही अभी काफी वक्त हो… लेकिन, यह साल मध्य प्रदेश के सियासी दलों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा… हम यह इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि यही वह साल होगा, जब मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव आयोजित होंगे… कांग्रेस ने 2018 के विधनासभा में आदिवासी वर्ग के सहारे विपक्षी दल होने का दंश खत्म किया था… हालाकि, कांग्रेस सत्ता का सुख महज 15 माहीने ही भोग पाई थी… उसके इतर अब कांग्रेस ने एक बार फिर 2023 के चुनावी रण के पहले एक बार फिर जनजाति वोटर्स को साधने की जुगत में है… जिसको लेकर कांग्रेस मध्यप्रदेश में पदयात्रा निकालने जा रही है… ये यात्रा विश्व आदिवासी दिवस से शुरू होकर 15 अगस्त तक की जाएगी… यात्रा के दौरान पार्टी नेताओ का फोकस उन विधानसभा में ज्यादा होगा… जिसमे आदिवासी मतदताओ की संख्या जयादा है… इधर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ यात्रा का शुभारभ पातालपानी स्थित आदिवासी क्रांतिकारी नेता टंट्या भील की प्रतिमा से करेगे… आइये… सबसे पहले एक नजर डालते है मध्यप्रदेश में आदिवासी समुदाय की जनसंख्या पर…

– मप्र की कुल जनसंख्या की लगभग 20 प्रतिशत आबादी आदिवासी है…

– जनगणना 2011 के मुताबिक, मध्यप्रदेश में 43 आदिवासी समूह…

– इनमें भील-भिलाला आदिवासी समूह की जनसंख्या सबसे ज्यादा 59.939 लाख है…

– दूसरे नम्बर पर सबसे जयादा आबादी गोंड समुदाय है…

– आंकड़ों के अनुसर गोंड समुदाय की आबादी 50.931 लाख हैं…

– कोल-(11.666 लाख), कोरकू (6.308 लाख) और सहरिया (6.149 लाख) की आबादी है…

2018 में चुनाव के दौरान भी कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दलों ने आदिवासी मतदातो को साधने के लिए शाम दाम दंड भेद अपना लिया था… लेकिन, किस पार्टी ने आदिवासियों को प्रभावित किया आइये जान लेते है…

खास बातें

– 230 विधनासभा में से 84 सीटो पर आदिवासी वर्ग सीधा प्रभाव…

– 2013 में आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 47 सीटों में से भाजपा ने 31 सीटें पर किया था कब्ज़ा…

– 2018 के चुनाव में आदिवासी वर्ग कांग्रेस की तरफ हुआ शिफ्ट…

– 2018 के चुनाव में आदिवासी आरक्षित 47 में से 30 सीटें कांग्रेस को मिली थी…

– बीजेपी को महज 16 सीटो पर करना पडा था संतोष, एक सीट निर्दलीय के खाते में…

– इस आयोजन को लेकर मप्र कांग्रेस के प्रवक्ता आनंद जाट का कहना है कि, कांग्रेस चुनाव के लिए कोई काम नही करती… कांग्रेस पार्टी और आदिवासियों का नाता 100 साल से ज्यादा समय से है… दोनों का साथ तबसे है जब चुनाव और वोट बैंक जैसी स्थिति नही थी… कमलनाथ जी के नेतृत्व में आदिवासियों के विकास लिए काम कांग्रेस पार्टी कर रही है…
– इधर, कांग्रेस की आदिवासी रणनीति पर बीजेपी ने बड़ा हमला बोला है… कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कहा है कि, कांग्रेस हर जगह नेतागिरी करती है… राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार रहीं द्रौपदी मुर्मू का अपमान किया था… 15 मई की कांग्रेस सरकार ने आदिवासियों का मजाक उड़ाया था… कमलनाथ आदिवासियों जवाब को दे कि, कांग्रेस शासनकाल में आदिवासियों के लिए क्या-क्या निर्णय लिए गए कांग्रेस आदिवासियों को वोट बैंक की तरह देखती है…
– लंबे समय से सत्ता के सिंहासन पर बैठे प्रदेश सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान बीते चुनाव के परिणामो से सबक लेकर आदिवासी वोटर्स को साधने की पहले काफी पहले कर चुके है… जिसका गवाह जम्बूरी मैदान बन चुका है… जिसमे सीएम शिवराज का जादू आदिवासी वोटर्स के सिर चढ़कर भी बोला… वही अब देखना ये होगा कि, कांग्रेस इस पदयात्रा से आदिवासियों के दिल में पार्टी के लिए कितना रास्ता बना पायेगी…