अब पार्षदों पर फंसा पेंच!

0
57

बीजेपी की ओर से सीएम, प्रदेशाध्यक्ष ने संभाला मोर्चा
कांग्रेस में भी नहीं बन पा रही है आमराय
मीटिंग-रायशुमारी के बाद भी नहीं निकल रहा हल

महापौर पद के उम्मीदवारों के चयन के बाद पार्षदों के नाम पर अंतिम मुहर लगाने में कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दलों के पसीने छूट रहे हैं। राजधानी भोपाल सहित तमाम शहरों में भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के नाम फाइनल नहीं कर पाई है। अकेले भोपाल में ही कांग्रेस के 15 और भाजपा के 30 वार्डों पर पेंच फंसा है। गुरुवार सुबह से दोनों पार्टी के नेता मीटिंग कर रहे हैं। कई नामों पर सहमति नहीं बन पाई है। इन्हें पार्टी होल्ड पर रखकर बाकी प्रत्याशी घोषित कर सकती है।
कांग्रेस ने 10 दिन तक वार्डों में जाकर मीटिंग की और रायशुमारी करते हुए दावेदारों के बायोडाटा लिए। 85 वार्ड के लिए 500 से ज्यादा बायोडाटा आ चुके हैं। इन पर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के बंगले पर मंथन हो चुका है। 12 जून को ही प्रत्याशी तय हो चुके थे, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के वार्ड से ही चुनाव लड़ने वाले ‘क्राइटेरिया’ से सारे समीकरण गड़बड़ा गए। फ्रेमिंग चेंज होने के बाद नेता फिर से मंथन करने में जुटे। बावजूद 16 जून की सुबह तक लिस्ट जारी नहीं हो सकी। दरअसल, 15 से ज्यादा वार्ड ऐसे हैं, जहां पर विवाद की स्थित बन रही है। ऐसे में सभी वरिष्ठ नेता असंतुष्ठों को मना रहे हैं। ताकि, एक नाम फाइनल हो सके। इसके चलते ही गुरुवार दोपहर तक लिस्ट घोषित नहीं हो सकी। जिलाध्यक्ष कैलाश मिश्रा ने बताया, आज रात में या कल सुबह लिस्ट जारी कर देंगे।
बीजेपी में महापौर की तरह ही पार्षदों के नामों पर भी खासा मंथन चल रहा है। दो बार जिला कोर कमेटी की मीटिंग के बावजूद कुछ वार्डों को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। इसके चलते गुरुवार सुबह फिर से वरिष्ठ नेता एक जाजम पर बैठे और चर्चा की। बावजूद दोपहर तक लिस्ट सामने नहीं आ सकी है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि रात तक लिस्ट सामने आ सकती है। कुछ वार्ड होल्ड पर रखे जा सकते हैं।
भाजपा ने मालती राय और कांग्रेस ने विभा पटेल को मेयर कैंडिडेट घोषित किया है। दोनों ने प्रचार भी शुरू कर दिया है, लेकिन पार्षद पदों को लेकर खूब माथापच्ची हो रही है। इसके चलते दावेदार भी पशोपेश में है कि वे नॉमिनेशन भरे या नहीं? हालांकि, उन्होंने फार्म खरीदकर रख लिए हैं।
जबलपुर. मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव के लिए राजनीतिक दल टिकट बंटवारे के लिए संघर्ष कर रहे हैं. महापौर प्रत्याशी की घोषणा के बाद अब पार्षद टिकट के लिए मंथन चल रहा है. कांग्रेस हो या फिर बीजेपी दोनों ही पार्टी पार्षदों की टिकट के लिए जदोजहद करती नजर आ रही हैं
कई वॉर्ड ऐसे हैं जहां 10 से 12 आवेदन पार्टी के पास आए हैं. बीजेपी ने चयन समितियों के जरिए तीन-तीन नामों की पैनल तैयार कर लिया है. उनमें से एक नाम बाहर निकलेगा. लेकिन यह कब तक हो पाएगा यह कह पाना बेहद मुश्किल है.
टिकट की सूची कब तक जारी हो पाएगी, यह कह पाना बेहद मुश्किल है. नाम के ऐलान से पहले ही टिकट के लिए दावेदारी करने वाले राजनीतिक कार्यकर्ता नामांकन फॉर्म खरीदने लगे हैं. नाम की घोषणा से पहले ही इस लेटलतीफी के कारण राजनीतिक दलों के अंदर नाराज कार्यकर्ताओं की संख्या में इजाफा होना तय माना जा रहा है. कांग्रेस व भाजपा दोनों पार्टियों ने यदि अपने घोषित क्राइटेरिया का पालन किया तो पिछली नगर निगम परिषद के 85 पार्षदों में से ज्यादातर बाहर हो जाएंगे। भाजपा द्वारा 50 साल से ज्यादा उम्र, दो चुनाव लड़ चुके नेताओं को टिकट नहीं देने और अनारक्षित वार्डों से सामान्य वर्ग के ही उम्मीदवारों को टिकट देने की बात कही जा रही है।
इन तीनों क्राइटेरिया पर देखें तो पिछली बार के दसों एमआईसी सदस्यों को टिकट नहीं मिल सकता। कांग्रेस भी युवाओं को मौका देने व वार्ड के मतदाता को ही टिकट देने की बात कर रही है। ऐसे में आरक्षण के कारण वार्ड बदल कर दावेदारी कर रहे नेताओं का टिकट खटाई में पड़ गया है। यहां बता दें कि इस बार 17 जून से पहले नाम फाइनल होना मुश्किल है।
भाजपा में संभागीय व जिला चयन समितियों की सुबह से देर रात तक बैठकें चलती रहीं, लेकिन पार्षद के टिकट तय नहीं हो सके। सभी विधायक और पूर्व विधायक अपने-अपने समर्थकों को टिकट के लिए दबाव बना रहे हैं, लेकिन संगठन 2010 व 2015 को दोहराना नहीं चाहता है। और विधायकों के समर्थकों की बजाय अन्य नेताओं को टिकट देने की बात हो रही है।
पार्षदों के टिकट में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा व कृषि मंत्री कमल पटेल भी रुचि ले रहे हैं। तीनों ने प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा व संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा को अपने पसंद के नामों की सूची सौंपी है। यह सूचियां जिलाध्यक्ष सुमित पचौरी के पास भी पहुंच गई हैं। संघ और विद्यार्थी परिषद के साथ मजदूर संघ ने भी अपनी पसंद के नाम आगे बढ़ाए हैं।
अब पार्षदों के टिकट के नामों की घोषणा के बाद ही पता चलेगा की आखिर चली किसकी और किसका साथ किस्मत ने नहीं दिया। या कौन क्राइटेरिया की भेंट चढ़ गया।