एनआरसी मुद्दे पर कांग्रेस के निशाने पर केंद्र सरकार, सांप्रदायिक आधार पर बांटने के लगाए आरोप

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नई दिल्ली । लोकसभा में कांग्रेस के सदस्य अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर बड़ा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वह समाज को सांप्रदायिक आधार पर बांटने की कोशिश कर रही है। गुरुवार को कांग्रेस सदस्य ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दावे का विरोध करते हुए कहा कि भाजपा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के बगैर एनआरसी को अपडेट करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार में एनआरसी को लेकर स्पष्टता नहीं है।

वहीं असम में भी कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार एनआरसी के जरिए धार्मिक रूप से अल्पसंख्यक समुदाय के एक धड़े को देश से निकालना चाहती है। जबकि अवैध रूप से रह रहे भाषाई अल्पसंख्यक समूह को देश में बसाए रखना चाहती है।

एनआरसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में मूल याचिकाकर्ता असम पब्लिक व‌र्क्स (एपीडब्लू) ने अमित शाह की घोषणा का स्वागत किया है। शाह ने कहा था कि पूरे देश में एनआरसी अपडेट होने के दौरान ही असम में फिर से एनआरसी को अपडेट किया जाएगा। इस बीच, माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने भाजपा पर एनआरसी की प्रक्रिया के जरिए देश में भय और दमन का माहौल बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने एनआरसी को नागरिकता संशोधन बिल से जोड़ने का भी भाजपा पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी फिर से लोगों को डराने का काम कर रही है।

वहीं, कर्नाटक में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने कहा कि अगर एनआरसी को पूरे देश में लागू किया जाएगा तो पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंध में तनाव आएगा। गौड़ा ने कहा कि सरकार इसे लागू करने के परिणामों पर विचार नहीं कर रही है। इससे नासिर्फ देश में समस्याएं खड़ी होंगी बल्कि दूसरे देशों के साथ रिश्ते भी गंभीर हो जाएंगे। शाह ने विगत बुधवार को राज्यसभा में कहा था कि देश के सभी नागरिकों को एनआरसी की प्रक्रिया से गुजरना होगा। फिर चाहे वह किसी भी धर्म के क्यों न हों।

उन्होंने यह भी कहा था कि एनआरसी की प्रक्रिया नागरिकता संशोधन बिल से अलग है। उन्होंने यह भी कहा था कि एनआरसी की प्रक्रिया असम में फिर अपडेट होगी। उसी दिन असम के वरिष्ठ मंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने कहा था कि राज्य सरकार ने अमित शाह से अपील की है कि वह मौजूदा स्वरूप में एनआरसी को खारिज करें।