राजस्थान संकट: भाजपा तमाशबीन, सचिन पायलट के पास विकल्प सीमित; अब आगे क्या

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राजस्थान में कांग्रेस के पास 108 विधायक हैं। गहलोत गुट 82 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है। पर इनमें से आधे से ज्यादा विधायक ऐसे हैं, जो आलाकमान के साथ हैं।

राजस्थान संकट: भाजपा तमाशबीन, सचिन पायलट के पास विकल्प सीमित; अब आगे क्या‘सत्यमेव जयते, नए युग की तैयारी’। राजस्थान के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट की तस्वीर के साथ यह पोस्टर राजस्थान के कई शहरों में चस्पा थे। लेकिन रविवार को सियासी घटनाक्रम के बाद तस्वीर बदल गई है। पायलट के लिए अब राह आसान नहीं है। उनके पास विकल्प सीमित हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक 82 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहे हैं। वहीं, पायलट के पास सिर्फ 26 एमएलए हैं।

प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व भी आसानी से गहलोत गुट की मांगों के सामने नहीं झुकेगा। ऐसे में टकराव टालने के लिए गहलोत और पायलट से गुट से बाहर किसी नाम पर विचार किया जा सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि पायलट के सामने क्या विकल्प हैं। पहला यह कि पायलट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बन जाएं और गहलोत गुट की मांग के मुताबिक वरिष्ठ नेता सीपी जोशी मुख्यमंत्री बनें।

राजस्थान में कांग्रेस के पास 108 विधायक हैं। गहलोत गुट 82 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है। पर इनमें से आधे से ज्यादा विधायक ऐसे हैं, जो आलाकमान के साथ हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व किसी ऐसे नेता को जिम्मेदारी सौंप सकती है, जिसका किसी गुट को संबंध नहीं हो।

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भाजपा का क्या है मूड
राजस्थान कांग्रेस में चल रहे घमासान पर भाजपा नेतृत्व कड़ी नजर रखे है। पार्टी इस मौके पर किसी तरह की जोड़-तोड़ में नहीं पड़ेगी, पर उसकी नजर भावी सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने पर रहेगी। राज्य में एक साल बाद विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में सत्तासीन कांग्रेस के अंदरूनी झगड़े भाजपा की चुनावी जमीन को मजबूत करेंगे।

राजस्थान में गहलोत और पायलट एक बार फिर आमने-सामने हैं। ऐसे में भाजपा को राजनीतिक तमाशबीन की भूमिका बेहतर नजर आ रही है। पार्टी के राजस्थान प्रभारी महासचिव अरुण सिंह ने कहा है कि राजस्थान के जो हालात हैं, उसमें जनता बदलाव के मूड में आ चुकी है। वह कांग्रेस का तमाशा देख रही है और उनकी असलियत के सामने आ रही है।

भाजपा की नजर गुर्जर समुदाय पर सूत्रों के अनुसार, फिलहाल सचिन पायलट भाजपा के सीधे संपर्क में नहीं हैं और न ही पायलट के पास अभी उतने विधायक हैं। हालांकि, भाजपा की नजर गुर्जर समुदाय पर भी है, जो सचिन पायलट के साथ है।