भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त नेता, फंड की कमी से जूझी कांग्रेस; ऐसे गंवाया मुनूगोड़े का गढ़

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2018 के तेलंगाना चुनाव में कांग्रेस ने 117 में से 19 विधानसभा सीटें जीतीं। उत्तम कुमार रेड्डी सांसद बने तो 2019 में विधायक का पद छोड़ दिया। उसी साल 12 विधायक सत्तारूढ़ टीआरएस से जा मिले।
भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त नेता, फंड की कमी से जूझी कांग्रेस; ऐसे गंवाया मुनूगोड़े का गढ़

तेलंगाना में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) ने मुनूगोड़े विधानसभा सीट के उपचुनाव में जीत हासिल की है। टीआरएस उम्मीदवार कुसुकुंतला प्रभाकर रेड्डी ने भाजपा के अपने निकटम प्रतिद्वंद्वी कोमातीरेड्डी राजगोपाल रेड्डी को 10 हजार से अधिक मतों से हरा दिया। राज्य के मंत्री व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के बेटे के. टी. रामाराव ने ट्वीट किया, ‘टीआरएस पार्टी और मुख्यमंत्री चंद्रशेखर के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त करने के लिए मुनूगोड़े के लोगों को धन्यवाद। वादे के अनुसार हम इस निर्वाचन क्षेत्र में लंबित कार्यों की शीघ्र प्रगति की दिशा में काम करेंगे।’

अगस्त में कांग्रेस विधायक कोमातीरेड्डी राज गोपाल रेड्डी के पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने के कारण इस सीट पर उपचुनाव कराने की जरूरत पड़ी। कांग्रेस प्रत्याशी का इस उपचुनाव में हराना पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। एक समय तेलंगाना कांग्रेस के लिए राजनीतिक ताकत के तौर पर काफी अहम हुआ करता था। 2004 और 2009 में कांग्रेस के केंद्र की सत्ता पर काबिज होने में इस राज्य ने बड़ी मदद की थी।

तेलंगाना में लगातार कमजोर होती गई कांग्रेस
कांग्रेस की पूर्व प्रमुख सोनिया गांधी को अक्सर तेलंगाना के गठन का श्रेय दिया जाता रहा है। इसके बावजूद पार्टी इससे राजनीतिक लाभ हासिल करने में असमर्थ रही। मालूम हो कि 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना अस्तित्व में आया। माना जाता है कि राज्य के टूटने और हैदराबाद के बंटवारे से आंध्र प्रदेश के लोग खुश नहीं थे। इसका नुकसान राज्य में कांग्रेस को साफ तौर पर हुआ।

कांग्रेस तेलंगाना में मुख्य विपक्षी दल भी नहीं रही
2018 के तेलंगाना चुनाव में कांग्रेस ने 117 में से 19 विधानसभा सीटें जीतीं। उत्तम कुमार रेड्डी सांसद बने तो 2019 में विधायक का पद छोड़ दिया। उसी साल 12 विधायक सत्तारूढ़ टीआरएस से जा मिले, जिसके बाद कांग्रेस के पास सिर्फ 6 सीटें रह गईं। पार्टी के लिए यह बड़ा झटका था। इतना ही नहीं, कांग्रेस ने तेलंगाना में मुख्य विपक्षी दल का अधिकार भी खो दिया।

भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त हो गए पार्टी नेता
टीआरएस और बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस के पास खर्च करने के लिए उतना फंड भी नहीं था। साथ ही पार्टी नेताओं का ध्यान उपचुनाव और राहुल गांधी की भारत जोड़ी यात्रा के बीच बंट गया, जो इलेक्शन से एक सप्ताह पहले राज्य से होकर गुजरी। राहुल गांधी राज्य में रहने के बावजूद प्रचार करने के लिए मुनुगोड़े नहीं गए। सीनियर नेताओं ने इसे ‘केवल एक उपचुनाव’ कहकर नजरअंदाज कर दिया। दूसरी ओर टीआरएस ने यहां जीत हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी।

कांग्रेस के पास खोई ताकत दिखाने का था मौका
मुनूगोड़े में कांग्रेस की मजबूत पकड़ रही है। पार्टी के लिए अपनी ताकत दिखाने का यह एक मौका था, जिसे उसने खो दिया है। कांग्रेस ने उपचुनाव में पलवई श्रावंती को अपना उम्मीदवार बनाया, जिनके पिता ने लंबे समय तक इस क्षेत्र की सेवा की थी। पार्टी को उम्मीद थी कि 1.2 लाख महिला मतदाता उनका समर्थन करेंगी। हालांकि, ऐसा नहीं हो सका। वहीं, भाजपा अगर यह उपचुनाव जीत जाती तो निश्चित तौर पर वह राज्य में अपनी बढ़त बना लेती। 2023 में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव में बीजेपी मजबूत दावेदारी के साथ खड़ी होती।