विकास कार्यों पर खर्च के लिए राज्यों ने बजट में मांगी अधिक धनराशि, फिस्कल डेफिसिट के लक्ष्य में भी की राहत की मांग

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नई दिल्ली : विकास कार्यो पर खर्च के लिए राज्य अगले बजट में न केवल ज्यादा राशि चाहते हैं, बल्कि फिस्कल डेफिसिट के लक्ष्यों में भी राहत की गुंजाइश तलाश रहे हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बजट पूर्व बैठक में राज्यों के वित्त मंत्रियों ने आइजीएसटी के बकाया के भुगतान का मुद्दा भी उठाया।बैठक में गोवा, हरियाणा और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री, दिल्ली, बिहार, अरुणाचल प्रदेश और तमिलनाडु के उप मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ 17 राज्यों के वित्त मंत्रियों ने हिस्सा लिया।

सीतारमण ने बैठक में सहकारी संघवाद की अवधारणा पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार आर्थिक विकास की रफ्तार बढ़ाने के उपायों पर काम कर रही है। इस मौके पर राज्यों ने कहा कि मौजूदा वक्त में देश में सरकारी खर्च में वृद्धि की आवश्यकता है। इसलिए राज्यों को विकास कार्यो पर खर्च के लिए अधिक धनराशि की दरकार होगी।

राज्यों की वित्तीय हालत के मद्देनजर प्रदेश सरकारों पर राजकोषीय संतुलन बनाए रखने का दबाव रहता है। इसकी वजह से सरकारें एक सीमा से अधिक अपने व्यय को विस्तार नहीं दे पातीं। केरल के वित्त मंत्री थॉमस आइजैक ने ट्वीट कर जानकारी दी कि बैठक में बिहार और केरल के वित्त मंत्रियों ने फिस्कल डेफिसिट की सीमा को चार परसेंट तक बढ़ाने का सुझाव दिया।

वैसे भी कई विशेषज्ञों का मानना है कि चालू वित्त वर्ष में फिस्कल डेफिसिट 3.6 से 3.8 परसेंट के बीच रह सकता है।दिल्ली के उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेशों को मिलने वाली राशि का मुद्दा उठाया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ऐसे केंद्रशासित प्रदेशों को केवल केंद्रीय करों में हिस्सा मिलता है। वह भी 2001-02 से 325 करोड़ रुपये पर सीमित है। जबकि बाकी सभी राज्यों को हर साल बढ़ा हुआ हिस्सा मिलता है। सिसोदिया ने चालू वित्त वर्ष के लिए 7150 करोड़ रुपये और 2020-21 के लिए 8150 करोड़ रुपये की मांग की।