वित्तीय घोटाले के आरोपों में फंसी DHFL के बोर्ड को RBI ने किया निरस्त, शुरू होगी दिवालिया प्रक्रिया

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नई दिल्ली : वित्तीय घोटाले के आरोपों में फंसी एक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन (डीएचएफएल) के प्रबंधन को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने बुधवार को निरस्त कर दिया। डीएचएफएल में वित्तीय गड़बड़ियों और इसमें प्रबंधन की मिलीभगत के बारे में कई महीनों से सूचनाएं मिल रही थी। कंपनी एक के बाद एक कई देनदारियों का भुगतान भी नहीं कर पा रही थी।

ऐसे में आरबीआइ ने बुधवार को एक आदेश जारी कर इसके प्रबंधन को निरस्त कर दिया और इंडियन ओवरसीज बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक आर. सुब्रमणियकुमार को डीएचएफएल का नया प्रशासक नियुक्त किया गया है। इस बारे में सूचना देते हुए आरबीआइ ने यह भी कहा है कि डीएचएफएल की जल्द दिवालिया कानून के तहत आवश्यक प्रक्रिया शुरू की जाएगी। आरबीआइ की तरफ से नियुक्त नए प्रशासक की तरफ से जल्द ही इंन्सॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आइबीसी) के तहत दिवालिया प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

इसके लिए एनसीएलटी के पास आवेदन किया जाएगा कि वह जल्द दिवालिया प्रक्रिया के लिए उपयुक्त रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) की नियुक्ति करे। माना जाता है कि डीएचएफएल की विभिन्न योजनाओं में करीब एक लाख निवेशकों के तकरीबन 15 हजार करोड़ रुपये जमा हैं। साथ ही इस पर बैंकों का भी तकरीबन 38,000 करोड़ रुपये बकाया है। इसके अलावा दर्जनों म्यूचुअल फंड्स कंपनियों ने भी इसमें निवेश किया हुआ है।

कुल मिलाकर कंपनी पर 88,000 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। ऐसे में कंपनी की परिसंपत्तियों से सारी देनदारियों का भुगतान होने को लेकर भी आशंका जताई जा रही है। गौरतलब है कि कुछ निवेशकों की तरफ से पहले ही मुंबई हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी डीएचएफएल के खिलाफ याचिकाएं दायर की गई हैं और मामले चल रहे हैं। डीएचएफएल जमा स्वीकार करने के साथ ही होम लोन देने वाली एनबीएफसी है।

इममें गड़बड़ी की सूचनाएं एक अन्य एनबीएफसी आइएलएंडएफएस में हुए वित्तीय घोटाले के आसपास ही आनी शुरू हुई थीं। कंपनी प्रबंधन ने पहले तो इससे इन्कार किया, लेकिन कुछ ही दिनों में यह स्पष्ट हो गया कि बड़ा कॉरपोरेट घोटाला चल रहा है। डीएचएफएल और आइएलएंडएफएस में घोटाला लगभग एक जैसा है। एक प्रमुख मीडिया हाउस ने कंपनी के पूरे प्रबंधन को कठघरे में इस वर्ष जनवरी में तब खड़ा कर दिया जब उसने एक रिपोर्ट में दिखाया कि किस तरह से गैरकानूनी तरीके से फंड का हस्तांतरण हो रहा है।

कंपनी के प्रवर्तकों की तरफ से गठित छोटी-छोटी बेनामी कंपनियों में फंड को गैरकानूनी तरीके से हस्तांतरित करने का आरोप लगाया गया।कंपनी के प्रमुख प्रवर्तक वधावन ग्लोबल कैप्टिल्स लिमिटेड है जिनका अभी भी इसमें 37.3 फीसद हिस्सेदारी है। वधावन परिवार के कुछ दूसरे सदस्यों के पास संयुक्त तौर पर 1.90 फीसद हिस्सेदारी है। जुलाई में जब कंपनी के वित्तीय परिणाम सामने आए तो इसमें 2,223 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। तब यह साफ हो गया कि वित्तीय गड़बड़ियों की बात सच है।

प्रवर्तन निदेशालय ने भी जांच की जिसमें हजारों करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आई। केपीएमजी ने कंपनी के रिकार्ड्स की फॉरेंसिक जांच में यह स्पष्ट कर दिया कि फंड का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता रहा है। बैंकों से यह कह कर कर्ज लिया गया कि उसे होम लोन के तौर पर बांटा जाएगा, लेकिन उसे ग्रुप की दूसरी दर्जनों कंपनियों में भेज दिया गया।