एफडी पर ब्याज छह फीसदी से नीचे आने पर निवेशकों के पास पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि खाता, ईएलएसएस और म्युचुअल फंड बेहतर विकल्प

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हाल के दिनों में बैंकों ने सावधि जमा (एफडी) पर ब्याज दरों में बड़ी कटौती की है।एसबीआई में एक साल साल की एफडी कराने की चाहत रखने वालों को मौजूदा महंगाई की दर के मुकाबले करीब एक फीसदी कम ब्याज मिलेगा। इसका मतलब यह है कि असल में उन्हें ब्याज से कोई कमाई नहीं होगी। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में निवेश पर निश्चित आय पाने के लिए पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि खाता व ईएलएस बेहतर विकल्प हैं। इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक की एक साल की एफडी पर ब्याज दर घटकर 5.10% पर आ गई है। वहीं, जून में खुदरा महंगाई की दर बढ़कर 6.09% पर पहुंच गई। यानी महंगाई ने एफडी को पछाड़ दिया है। निवेश पर वास्तविक ब्याज दर निगेटिव हो गई है।

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि एफडी पर ब्याज छह फीसदी से नीचे आने पर निवेशकों के पास पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि खाता, ईएलएसएस और म्युचुअल फंड बेहतर विकल्प हैं। सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) पर मौजूदा समय में 7.1% दर से ब्याज मिल रहा है। वहीं, सुकन्या समृद्धि खाता पर 7.6% ब्याज मिल रहा है। वैसे निवेशक जो थोड़ा जोखिम लेना चाहते हैं वह इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस) और म्यूचुअल फंड में निवेश कर आसानी से 10 से 12 फीसदी का रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं। ईएलएसएस पर आप टैक्स छूट का लाभ भी ले सकते हैं।

आरबीआई की कटौती का असर

आरबीआई ने मार्च और मई में बेंचमार्क रेपो रेट में 1.15 फीसदी की कटौती की है। इसके चलते मौजूदा समय में रेपो रेट घटकर चार फीसदी पर आ गई है। इसके चलते बैंकों को कर्ज सस्ता करना पड़ा है। बैंक इसकी भरपाई के लिए जमा पर ब्याज दरों में तेजी से कटौती कर रहे हैं। इसका असर लाखों जमाकर्ताओं को उठाना पड़ रहा है। सबसे अधिक नुकसान वरिष्ठ नागरिकों को हुआ है क्योंकि वह एफडी से प्राप्त होने वाले आय पर सबसे अधिक निर्भर होते हैं।

निवेश पर महंगाई का असर

महंगाई, पैसे से खरीदने की ताकत को कम करती है। ज्यादा महंगाई मतलब पैसे का मूल्य कम होना है। मान लीजिए आप 20 साल बाद रिटायर होने वाले हैं। आपके हिसाब से आज रिटायरमेंट के लिए एक करोड़ रुपये काफी हैं। मौजूदा समय में आपका मासिक खर्च 50,000 रुपये है। महंगाई अगर आठ फीसदी की दर से बढ़ती है तो 20 साल बाद 50,000 रुपये की वैल्यू 2.30 लाख रुपये होगी। इस तरह 20 साल बाद रिटायरमेंट के लिए 4.5 करोड़ रुपये का लक्ष्य सही है।