GST काउंसिल के फैसलों पर राजनीति इस संस्था का अपमान : निर्मला सीतारमण

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नई दिल्ली। सरकार ने जीएसटी काउंसिल के फैसलों के राजनीतिकरण को इस संस्था का अपमान बताया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में मंगलवार को कहा कि जीएसटी काउंसिल एक स्वतंत्र संस्था है जिसमें हर राज्य के वित्त मंत्री सदस्य के रूप में शामिल हैं। वे सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हैं और उसके बाद फैसले लेते हैं। ऐसे में इसके फैसलों का राजनीतिकरण एक तरह से इस स्वतंत्र संस्था के अपमान के बराबर है।प्रश्नकाल में एनसीपी की एक सांसद के सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति की भरपाई एक निर्धारित फार्मूला के तहत की जाती है। इस फार्मूला का निर्धारण जीएसटी काउंसिल विचार-विमर्श के बाद करती है और किसी को उस फार्मूला से छेड़छाड़ का कोई अधिकार नहीं है।

हर राज्य को जीएसटी क्षतिपूर्ति की रकम का निर्धारण इसी फार्मूला के आधार पर होता है और उसमें उस संबंधित राज्य के वित्त मंत्री की भी सहमति होती है। एनसीपी सांसद वंदना चाह्वाण का सवाल था कि जीएसटी क्षतिपूर्ति मद में गैर-भाजपा शासित राज्यों का बकाया अधिक क्यों है। खासतौर पर महाराष्ट्र के संदर्भ में उनका कहना था कि देश के लिए महाराष्ट्र सर्वाधिक जीएसटी कमाने वाला राज्य है। फिर भी जीएसटी क्षतिपूर्ति के मद में उसका केंद्र पर सर्वाधिक बकाया है।

राज्यों को 53,600 करोड़ का भुगतान बाकी

वित्त मंत्री ने राज्यसभा को बताया कि चालू वित्त वर्ष में राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति के मद में 53,600 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है। राज्यों को इस मद में अब तक 96,576 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसके अलावा राज्यों को कर्ज के रूप में 1.59 लाख करोड़ रुपये की राशि मुहैया कराई गई है, ताकि जीएसटी लागू होने के बाद राजस्व की हुई कमी से राज्यों को नुकसान नहीं उठाना पड़े। उल्लेखनीय है कि जीएसटी कानून के तहत पहली जुलाई, 2017 को इसके लागू होने के पांच वर्षो तक राज्यों को टैक्स वसूली के मद में हुई कमी की भरपाई करने का केंद्र ने वादा किया हुआ है। यह रकम राज्यों को हर दो महीने में एक बार दी जा रही है।

एबीजी मामले में कोई बैंक अधिकारी शामिल नहीं

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा को यह भी बताया कि एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड (एबीजीएसएल) द्वारा 14,349 करोड़ रुपये घोटाला मामले में किसी भी सार्वजनिक बैंक का कोई अधिकारी शामिल नहीं है। सीबीआइ ने कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ पिछले महीने इस मामले में एक मामला दर्ज कर लिया है। सीतारमण ने बताया कि कंपनी को आइसीआइसीआइ बैंक के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम ने लोन मुहैया कराया था और बैंकों ने अगस्त, 2013 के बाद इस लोन अकाउंट को फंसे कर्ज (एनपीए) की कैटेगरी में डालना शुरू कर दिया।

क्रिप्टोकरेंसी लांच करने की योजना नहीं

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि क्रिप्टोकरेंसी लांच करने की उसकी कोई योजना नहीं है। राज्यसभा में मंगलवार को वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि वर्तमान में कोई भी क्रिप्टोकरेंसी भारत में नियमन के दायरे में नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) कोई क्रिप्टोकरेंसी जारी नहीं कर रहा है। वह कागज पर छपी मुद्रा जारी करता है और देश में वही वैध मुद्रा है। अभी जिस सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) की बात चल रही है, वह कागज पर छपी इसी मुद्रा का डिजिटल स्वरूप होगा।