कोरोना की मार: 1.89 करोड़ लोगों की अप्रैल के बाद गईं नौकरियां

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कोरोना वायरस महामारी की वजह से अप्रैल से अब तक 1.89 करोड़ वेतनभोगी कर्मचारियों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है।सेंटर ऑफ मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के ताजा आंकड़ों में यह बात सामने आई है। यह पिछले नौ सप्ताह का सबसे तेज आंकड़ा है। गत 14 जून के बाद एक बार फिर बेरोजगारी दर ने इस स्तर को पार किया है। सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक यह दर पूरे जुलाई महीने की सकल बेरोजगारी दर 7.43 फीसदी से भी ज्यादा है और कोविड 19 के देश में पैर फैलाने से पहले दर्ज मासिक बेरोजगारी दर से भी अधिक है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। इसमें कहा गया है कि जुलाई में 50 लाख लोगों की नौकरी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक अकेले अप्रैल में 1.77 करोड़ लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। जबकि मई में केवल एक लाख नौकरियां गईं। इसमें कहा गया है कि जून में 39 लाख नई नौकरियों के अवसर भी बने हैं। सीएमआईई के सीईओ महेश व्यास ने कहा कि वेतनभोगी लोगों की नौकरी आसानी से नहीं जाती हैं लेकिन एक बार नौकरी छूट जाने पर बहुत मुश्किल से मिलती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अवधि में 68 लाख दिहाड़ी मजदूरों को भी रोजगार से हाथ धोना पड़ा है।
9 हफ्तों के पीक पर पहुंची राष्ट्रीय बेरोजगारी दर
भारत में बेरोजगारी दर गत 16 अगस्त को समाप्त सप्ताह में नौ सप्ताह के शीर्ष पर पहुंच गई। ये आकंड़े अर्थशास्त्रियों के इस तर्क के बिल्कुल सटीक बैठते हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि बेरोजगारी में आई पिछली गिरावट कृषि गतिविधियों में गिरावट की वजह से थी और यह गिरावट अस्थाई प्रकृति की थी। पिछले सप्ताह राष्ट्रीय बेरोजगारी दर 9.1 फीसदी तक पहुंच गई जो 9 अगस्त को समाप्त सप्ताह में 8.67 फीसदी पर थी।