दिवालिया कानून में संशोधन को मिली कैबिनेट की मंजूरी, ये हैं नए नियम

0
114

नई दिल्ली : दिवालिया होने वाली कंपनियों के नए प्रमोटर्स को पुरानी कंपनी या उसके प्रमोटर्स पर चल रहे आपराधिक मामलों से मुक्त रखा जाएगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को इन्सॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कानून (आइबीसी) में इस आशय के संशोधन के एक प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी। कैबिनेट ने सरकारी बैंकों को एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस बैंकों के ऊंची रेटिंग वाली संपत्तियां खरीदने के अधिकार को भी मंजूरी दे दी। आइबीसी में इस बदलाव की उद्योग जगत लंबे अरसे से मांग कर रहा था।

सरकार के इस प्रस्ताव का आशय दिवालिया कंपनियों के मामले निपटाने में आ रही दिक्कतों को दूर करने पर था। सरकार ने अपने एक बयान में कहा है कि इसी वजह से आइबीसी (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2019 का प्रस्ताव किया गया था।बैठक के बाद अपने बयान में सरकार ने कहा है कि यह कदम कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी के प्रस्तावों के निपटारों में आ रही दिक्कतों को दूर करेगा।

जानकारों के मुताबिक दिवालिया प्रक्रिया के लिए प्रस्तावित कंपनियों में खरीदार इसलिए दिलचस्पी नहीं ले रहे थे, क्योंकि वे कंपनी के पुराने मामलों की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते थे। इसलिए उद्योग इस नियम में बदलाव की लगातार मांग कर रहा था। इन्सॉल्वेंसी मामलों के जानकार और आइसीएआइ के पूर्व काउंसिल सदस्य व सीए विजय कुमार गुप्ता का मानना है कि इससे मामलों को निपटाने की रफ्तार बढ़ेगी और नए प्रमोटर्स की रुचि भी बढ़ेगी।

कैबिनेट ने सरकारी बैंकों को मजबूत वित्तीय स्थिति वाली एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की उच्च रेटिंग वाली संपत्तियां खरीदने का अधिकार देने वाली स्कीम को भी स्वीकृति प्रदान कर दी। इस पार्शियल क्रेडिट गारंटी स्कीम के दायरे में पहली अगस्त, 2018 से एक वर्ष पहले तक एसएमए-0 केटेगरी में शामिल एनबीएफसी और एचएफसी आएंगी।