US-भारत वैज्ञानिक संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने का प्लान तैयार, चीन की होगी छुट्टी!

0
132

वॉशिंगटन. जून 2008 में अमेरिका-भारत परमाणु सहयोग (US-India Nuclear Cooperation) और रणनीतिक गठबंधन की अजीबोगरीब बातों के बीच, वॉशिंगटन डीसी की एक जिला कोर्ट ने दक्षिण कैरोलिना, सिंगापुर और बेंगलुरु में कार्यालयों वाली एक इलेक्ट्रॉनिक्स फर्म के सीईओ पार्थसारथी सुदर्शन (Parthasarathy Sudarshan) को 35 महीने की जेल की सजा सुनाई. पार्थसारथी पर तेजस सहित भारत की बैलिस्टिक मिसाइलों, अंतरिक्ष प्रक्षेपण वाहनों और लड़ाकू विमानों के विकास में सहायता के लिए 500, i960 माइक्रोप्रोसेसरों को अवैध रूप से निर्यात करने की साजिश रचने का आरोप था.

TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार i960 चिप्स इतने मामूली थे कि उसे किसी भी स्टोर से खरीदा जा सकता था. यह घटना तब हुई जब चीन अमेरिका के साथ समानता के लिए खिल्लियां उड़ा रहा था. वह आसानी से अमेरिकी निर्यात प्रतिबंधों को दरकिनार कर रहा था. और अमेरिका इन सब के बीच निश्चिंत था. लेकिन अब ऐसा प्रतीत होता है कि वॉशिंगटन अंतत: चीनी खतरे और भारत के प्रति अपने गलत अविश्वास के प्रति जाग गया है जो पीढ़ियों से चला आ रहा था.

एक अभूतपूर्व जुड़ाव में भारत और अमेरिका दोनों पक्षों के शीर्ष अधिकारी इस सप्ताह महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों (iCET) पर यूएस-इंडिया इनिशिएटिव को आगे बढ़ाने के लिए बैठक कर रहे हैं. इसका उद्देश्य आपसी संकुचन पर काबू पाना और आपसी विश्वास से संचालित एक इको-सिस्टम विकसित करना है. मई 2022 में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe biden) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) द्वारा लिए गए निर्णय के बाद, शीर्ष भारतीय रणनीतिक और वैज्ञानिक प्रमुखों का एक प्रतिनिधिमंडल आज वॉशिंगटन में अपने अमेरिकी समकक्षों से मिल रहा है ताकि संबंधों को अगले स्तर पर लाया जा सके.

भारतीय प्रतिनिधिमंडल की संरचना स्‍वयं ही संकेत देती है कि क्या होने जा रहा है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं. इसमें इसरो के अध्यक्ष एस. सोमनाथ, प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद शामिल हैं. इसके साथ ही रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार जी सतीश रेड्डी, दूरसंचार विभाग के सचिव के. राजाराम और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के महानिदेशक समीर कामत भी इसमें शामिल हैं.