Birth Anniversary: विदेशों में फंसे भारतीयों के लिए ‘संकट मोचक’ थीं सुषमा स्वराज, मात्र 6 मिनट में ऐसे बचाई थी जान

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नई दिल्ली: भारतीय राजनीति की दुनिया में सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) एक ऐसा नाम है जो अविस्मरणीय भी हैं और अमर भी. यह राष्ट्रवाद का नम्र चेहरा ज्ञान-विज्ञान और आध्यात्मिकता की समृद्धि से परिपूर्ण था. आज सुषमा स्वराज का जन्मदिन है. वो न सिर्फ सभी की चहेती नेता थीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीयों के लिए ‘संकट मोचक’ थीं. देश की कद्दावर नेता सुषमा स्वराज को आज हर कोई याद कर रहा है. उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको ‘ऑपरेशन संकट मोचन’ के बारे में बता रहे हैं जो गवाह है सुषमा और उनके द्वारा पहुंचाई गई मदद का.

सुषमा स्‍वराज ने दक्षिण सूडान में छिड़े गृह युद्ध के दौरान साल 2016 में वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी में बड़ी भूमिका निभाई थी. इस ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन संकट मोचन’ नाम दिया गया. इसके जरिए सूडान से 150 भारतीयों को निकाला. इसमें 56 लोग केरल के रहने वाले थे.

‘ऑपरेशन संकट मोचन’
इस ऑपरेशन के तहत जनरल वीके सिंह दो विमान लेकर सूडान पहुंचे थे और तकरीबन 150 भारतीयों को एयर लिफ्ट कर सुरक्षित वापस भारत लाया गया था. इसके बाद सुषमा स्वराज लीबिया में सरकार और विद्रोहियों के बीच छिड़ी जंग के दौरान 29 भारतीयों को वहां से सुरक्षित भारत लेकर आई थीं.

6 मिनट में बचाई थी जान!
‘ऑपरेशन संकट मोचन’ के कई पीड़ितों में से एक पीड़ित परिवार है मुंबई का देढिया परिवार. मुंबई की रहने वाली नेहा देढिया ने जुलाई 2016 में सोशल मीडिया पर ट्विटर के जरिए सुषमा स्वराज जी से अपने पति के लिए मदद मांगी थी. नेहा के पति हिमेश अपने व्यापार के सिलसिले में साउथ सूडान गए थे और वहां जंग के हालात में दूसरे भारतीयों के साथ फंस चुके थे.

एक ट्वीट पर पहुंचाती थीं मदद
उन्होंने ट्विटर के जरिए बताया था कि हिमेश एक डायबिटिक मरीज हैं और उस समय उनके पास इंसुलिन खत्म हो गई थी. वक्त रहते उन्हें दवाई नहीं मिलती तो शायद उनकी जान भी जा सकती थी. मुंबई से नेहा ने सुषमा जी को ट्वीट किया और महज 6 मिनट के भीतर ही सुषमा जी ने नेहा को जवाब देकर मदद भिजवाने का आश्वासन दिया. इसके बाद ना सिर्फ हिमेश तक दवाई पहुंचाई गई बल्कि केंद्र सरकार ने सूडान में फंसे भारतीयों को एयरलिफ्ट करने के लिए ऑपरेशन संकट मोचन भी लांच किया.