स्मृति का केजरीवाल सरकार पर हमला, निर्भया के नाबालिग दोषी को 10 हजार रुपये क्यों दिए?

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नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने शुक्रवार को निर्भया मामले के आरोपियों में से एक आरोपी मुकेश की दया याचिका को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा खारिज किये जाने का स्वागत किया. ईरानी ने कहा कि जिस तरह केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति महोदय को तेजी से दया याचिका फैसले के लिए भेजी और उस पर राष्ट्रपति महोदय ने बिना देर किए खारिज करने का जो फैसला लिया, उससे देश की महिलाओं में न्याय के प्रति एक नयी उम्मीद जगी है. उन्होंने कहा कि निर्भया को जो न्याय मिल रहा है उसमें उनकी मां आशा देवी के घर्ष की बड़ी भूमिका है और हम उनके जज्बे को सलाम करते हैं.

दिल्ली भाजपा कार्यालय पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुये स्मृति ईरानी ने कहा, यह अत्यंत दुखद है कि जहां सारा देश निर्भया को त्वरित न्याय के पक्ष में लामबंद है तो बीते 5 साल में अनेक बार निर्भया मामले में न्यायालयों में पाया गया कि दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने मामले में टालमटोल की.

मामले को लटकवाने का प्रयास
स्मृति ने कहा, ”मैं एक महिला कार्यकर्ता के नाते आम आदमी पार्टी की सरकार की इस टालमटोल पर आक्रोश व्यक्त करती हूं और देश के सभी नागरिकों को बताना चाहती हूं कि जेल विभाग दिल्ली सरकार के तहत आता है और सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2018 में निर्भया के आरोपियों की रिव्यू पिटीशन खारिज कर दी थी, पर उसके बाद लंबे समय तक जेल प्रशासन और फिर केजरीवाल सरकार खुद भी मामले को दबाये बैठे रहे. इसी तरह दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने अभी दो दिन पहले कोर्ट में मामले को व्यवस्थाओं का हवाला देकर लटकवाने का प्रयास किया.”

मां को न्याय से वंचित रखा गया?
स्मृति ईरानी ने पूछा दिल्ली व देश की जनता जानना चाहती है कि आखिर क्या कारण है कि निर्भया मामले में उसकी मां को न्याय से वंचित रखा गया? क्या कारण है कि आम आदमी पार्टी के वकील ने कोर्ट में कहा कि वर्तमान में बलात्कारियों को सजा देने में देरी हो सकती है? क्या कारण है कि बलात्कार में सबसे अधिक बर्बरता करने वाले नाबालिग दोषी की रिहाई पर आम आदमी पार्टी की सरकार ने उसे 10 हजार रुपये दिए थे?

ऐसी पार्टी पर धिक्कार है
बीजेपी नेत्री स्मृति ने कहा, मैं आम आदमी पार्टी की सरकार से कहना चाहती हूं कि जुलाई 2018 के रिव्यू पीटिशन कोर्ट द्वारा खारिज किये जाने के बाद आम आदमी पार्टी की सरकार की वजह से निर्भया के गुनहगारों को तय समय पर फांसी नहीं हो पाई. ऐसी पार्टी पर धिक्कार है. यह मेरा मानना नहीं है बल्कि हिन्दुस्तान के हर न्याय प्रेमी का मानना है.

दोष लगाने से कोई फायदा नहीं
बीजेपी की महिला नेता के आरोपों पर सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, ”एक दूसरे पर दोष लगाने से कोई फायदा नहीं होगा. हमें एक ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जहां बलात्कारियों को अपराध के 6 महीने के भीतर फांसी दे दी जाए.”

यह राजनीति करने का समय नहीं
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा, ”हर कोई चाहता है कि दोषियों को जल्द से जल्द सजा दी जाए. यह राजनीति करने का समय नहीं है. केंद्र और राज्य सरकार दोनों को यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि सभी प्रक्रियाएं पूरी हों और दोषियों को जल्द से जल्द फांसी दी जाए.

याचिका खारिज
गौरतलब है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार को निर्भया दुष्कर्म और हत्या मामले के एक दोषी मुकेश की दया याचिका खारिज कर दी. इसके पहले गृह मंत्रालय ने गुरुवार रात को ही राष्ट्रपति के पास दया याचिका की फाइल भेजी थी और उसे खारिज करने की सिफारिश की थी. अदालत ने निर्भया मामले में चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है.

दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय से समीक्षा के लिए भेजे जाने और इसे प्राप्त करने के कुछ घंटे बाद ही गृह मंत्रालय ने गुरुवार रात ही इसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया था.

इससे पहले, दिल्ली सरकार ने निर्भया कांड के दोषी मुकेश की दया याचिका को खारिज करते हुए इसे उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय को भेजा था. इसके बाद इसे गृह मंत्रालय को भेजा गया.

16 दिसंबर, 2012 को हुई इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. छह आरोपियों ने 23 वर्षीय महिला के साथ चलती बस में मिलकर दुष्कर्म किया था और उसकी बुरी तरफ पिटाई की थी. बाद में छात्रा की मौत हो गई थी.

सभी छह आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. आरोपियों में से एक नाबालिग था, इसलिए उसे किशोर अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया. वहीं अन्य आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी.