रविशंकर प्रसाद बोले; महिलाओं, बच्चों से जुड़े मामलों की जल्द जांच व सुनवाई करें सुनिश्चित

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नई दिल्ली। विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों तथा सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों की त्वरित जांच एवं पैरवी कराने का अनुरोध किया है।

सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को अलग-अलग लिखे पत्रों में प्रसाद ने कहा है कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा और संरक्षा राष्ट्रीय चिंता का विषय है। ऐसे में इनसे जुड़े सभी आपराधिक मामलों की दो महीने के भीतर जांच कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

छह महीने के अंदर फास्ट ट्रैक अदालतों में हो कार्रवाई

कानून मंत्री ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से भी महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुकदमों की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालतों में कराने और छह महीने के भीतर इसका पूरा होना सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया।

उल्लेखनीय है कि 2018 में पारित आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक में जांच और सुनवाई के लिए समय सीमाएं दी गई हैं।

1023 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों गठन करने का फैसला

इस समय देश में महिलाओं और बच्चों के प्रति अपराधों से संबंधित 1.66 मुकदमें विचाराधीन हैं। जिन्हें जल्द खत्म करने के लिए सरकार ने देश में 1023 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों के गठन का फैसला किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा है। अनुमान है कि प्रत्येक फास्टै्रक अदालत में इस प्रकार के 165 मुकदमों की सुनवाई होगी। कुल 1023 फास्ट्रैक अदालतों में से 289 अदालतें केवल बाल यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा यानी ‘पोक्सो’ एक्ट के तहत बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगी।