रंजन गोगोई का विपक्ष को जवाब, बोले- एक दिन मेरा स्वागत करेंगे आप

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नई दिल्ली । राज्यसभा में मनोनयन के साथ ही पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को लेकर शुरू हुआ विवाद और विरोध उनके शपथग्रहण तक चरम पर पहुंच गया। विपक्ष के जबरदस्त विरोध, नारेबाजी और वाकआउट के बीच गोगोई ने गुरुवार को राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ ली। कांग्रेस की अगुआई में कई विपक्षी दलों ने गोगोई के शीर्ष न्यायपालिका के पद के साथ समझौता करने का आरोप लगाया। संसदीय इतिहास में यह शायद पहला मौका था जब किसी सदस्य ने इतने विरोध के बीच शपथ ली हो। विरोध के सुर इतने तीखे और अप्रत्याशित थे कि विपक्षी सदस्यों ने उनके सामने ही शर्म-शर्म के नारे लगाए। सदन में असहज दिखने के बावजूद शांत बने रहे गोगोई ने बाहर यह कहते हुए विपक्ष को जवाब देने की कोशिश की कि ‘जल्द ही वे उनका स्वागत करेंगे और स्नेह भी करने लगेंगे।’

राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही सभापति वेंकैया नायडू ने सबसे पहले रंजन गोगोई को शपथ के लिए बुलाया। तभी विपक्षी सदस्यों ने गोगोई की ओर शर्म-शर्म के नारे लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस के एके एंटनी, आनंद शर्मा, जयराम रमेश से लेकर कुछ दूसरे विपक्षी दलों के सदस्य अपनी सीटों से खड़े होकर बेहद आक्रामक अंदाज में शपथ के लिए बढ़ रहे गोगोई पर शीर्ष न्यायिक पद पर रहते हुए सरकार से ‘डील’ करने के आरोप लगाए। कुछ विपक्षी सदस्यों ने तो यहां तक कह डाला कि सरकार के हक में फैसला देने के लिए गोगोई को यह इनाम मिला है।

इस जबरदस्त विरोध से असहज नजर आ रहे गोगोई की शपथ सुनिश्चित कराते हुए सभापति ने विपक्षी सदस्यों के एतराज को अनुचित ठहराया। सत्तापक्ष के सदस्यों ने विपक्षी आक्रमण के हमले को थामने के लिए मेजें थपथपाई। तब गोगोई ने अंग्रेजी में बतौर राज्यसभा सांसद शपथ ली और इसका विरोध करते हुए विपक्षी दलों ने उनके शपथ का बहिष्कार करते हुए सदन से वाकआउट किया।

संसद के दोनों सदनों में किसी सदस्य के शपथ का इतना तीखा विरोध का कोई दूसरा उदाहरण नहीं है। नये सदस्य का आमतौर पर गर्मजोशी से शपथ और तालियां बजाकर स्वागत होता है। वैसे शपथ से पहले ही राज्यसभा के रिकार्ड में जस्टिस गोगोई की जगह श्री गोगोई हो गए। सदन की कार्यसूची में सदस्य के तौर पर शपथ लेने के लिए उनके नाम के आगे जस्टिस की जगह श्री शब्द का उपयोग किया गया।

राज्यसभा की सदस्यता की शपथ लेने के बाद गोगोई सत्ता पक्ष की बेंच की ओर गए और हाथ जोड़कर सभी का अभिवादन किया। इसके बाद छठी पंक्ति में मनोनीत सदस्य सोनल मान सिंह की बगल की सीट पर आकर बैठ गए। सभापति नायडू ने विपक्षी सदस्यों के एतराज और वाकआउट पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मसलों पर सदन के बाहर बेशक उनके मत अलग हो सकते हैं। लेकिन संविधान के प्रावधान सभी को मालूम हैं और इसके तहत राष्ट्रपति को सदस्य नामित करने का अधिकार है। सभापति ने विपक्षी सदस्यों के विरोध को रिकार्ड से निकालने की घोषणा करते हुए कहा कि उनका आचरण सदन के सदस्य के प्रतिकूल है।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी गोगोई का बचाव करते हुए कहा कि विपक्षी दलों का रुख अनुचित है। इस सदन में कानूनविद् से लेकर प्रमुख हस्तियों को नामित करने की परंपरा रही है और गोगोई भी सदन में अपना योगदान देंगे। प्रसाद ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग विरोध कर रहे हैं वे रिटायर जजों को नामित कर चुके हैं। सरकार की अनुशंसा पर राष्ट्रपति ने अभी चार महीने पहले ही चीफ जस्टिस पद से रिटायर हुए गोगोई को राज्यसभा सदस्य के तौर पर मनोनीत किया है। गोगोई के चीफ जस्टिस कार्यकाल में अयोध्या मंदिर विवाद मुकदमा, राफेल, असम में एनआरसी से लेकर सबरीमाला जैसे बडे़ फैसले हुए।