Congress President: दुबारा कांग्रेस की कमान थामने को राहुल फिलहाल राजी नहीं

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नई दिल्ली। कांग्रेस के तमाम छोटे-बड़े नेता भले ही राहुल गांधी के फिर से संगठन की बागडोर संभालने की आवाज उठा रहे हैं मगर राहुल फिलहाल इस बारे में पुनर्विचार के लिए राजी नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी में इन दिनों राहुल की वापसी को लेकर शुरू हुई चर्चाओं की गरमी को थामने के लिए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी के शीर्ष नेताओं को अपने इस इरादे का फिर से संदेश दे दिया है।

कांग्रेस के नये स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर पार्टी में लंबे अर्से से जारी दुविधा के बीच राहुल गांधी का यह रुख पार्टी की चुनौती बढ़ाएगा। अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की अपनी सेहत से जुड़ी चुनौतियां हैं और वे लंबे समय तक पार्टी की बागडोर संभालने के लिए इच्छुक नहीं है। कांग्रेस की युवा ब्रिगेड के साथ सोनिया गांधी भी राहुल की दुबारा वापसी के पक्ष में बताई जाती हैं। लेकिन उनकी वापसी की मांग मुहिम पकड़े इससे पहले ही राहुल ने अपने रुख में बदलाव का संकेत न देकर कांग्रेस के नेतृत्व संकट को कहीं ज्यादा जटिल कर दिया है।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी ने कांग्रेस की कमान उनको सौंपने की शुरू हुई चर्चाओं के मद्देनजर दो टूक कह दिया कि उनके दुबारा अध्यक्ष बनने का अभी कोई सवाल नहीं है। इसीलिए पार्टी को नये नेतृत्व का फैसला करना चाहिए। राहुल का यह नजरिया इस्तीफा प्रकरण के दौरान अपनाए गए उनके रुख को ही दोहराता है। लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी की बड़ी पराजय के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया तब पार्टी नेताओं ने वापस लेने की मुहिम चलाई। कांग्रेस कार्यसमिति तक ने अपनी बैठक बुलाकर उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया मगर राहुल टस से मस नहीं हुए। आखिरकार तीन महीने के नेतृत्व संकट के बाद सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष की बागडोर सौंप कांग्रेस ने तत्कालिक समाधान निकाला।

कांग्रेस की लगातार बढ़ती राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर अब एक बार फिर स्थाई अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर पार्टी में असमंजस का दौर शुरू हो गया है। जाहिर तौर पर दुबारा वापस नहीं लौटने का राहुल का रुख पार्टी के इस असमंजस को और गहरा करेगा। अशोक गहलोत, वीरप्पा मोइली, जयराम रमेश, सलमान खुर्शीद, अश्विनी कुमार, शशि थरूर, जितिन प्रसाद, सचिन पायलट, मिलिंद देवड़ा, ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे पार्टी के वरिष्ठ और युवा नेता राहुल को दुबारा अध्यक्ष बनाने की आवाज उठा चुके हैं। नये नेतृत्व पर असमंजस की वजह से ही कांग्रेस के प्लीनरी अधिवेशन की तारीख अभी तक तय नहीं हुई है। हालांकि पार्टी में यह संभावना जताई जा रही कि संसद के बजट सत्र के बाद अप्रैल महीने में कांग्रेस का यह अधिवेशन बुलाया जा सकता है।