PoK में आज इमरान का ‘जलसा’, कश्मीर पर फिर दुनिया को बरगलाने की कोशिश

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कश्मीर पर पाकिस्तान की थ्योरी को दुनिया भले ही नकार चुकी हो, लेकिन प्रधानमंत्री इमरान खान की पैंतरेबाजी में कोई कमी नहीं आई है. ‘कश्मीर ऑवर’ के बाद अब इमरान खान पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) की राजधानी मुजफ्फराबाद में शुक्रवार एक बड़ा जलसा आयोजित करने वाले हैं. इस जलसे में पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम इमरान खान एक बार फिर से कश्मीर से जुड़े झूठ दुनिया के सामने परोसेंगे और दुनिया को बरगलाने की कोशिश करेंगे.

कश्मीर पर झूठ का पुलिंदा

इमरान खान ने 10 सितंबर को ट्वीट कर घोषणा की थी कि वे जुमे के रोज एक बड़ा जलसा मुजफ्फरबाद करने जा रहे हैं. इमरान खान ने ट्वीट किया, “मैं शुक्रवार यानी 13 सिंतबर को मुजफ्फरबाद में एक बड़ा जलसा करने जा रहा हूं, इसके जरिए मैं पूरी दुनिया का ध्यान कश्मीर पर लाने की कोशिश करूंगा और कश्मीरियों को यह दिखाऊंगा कि हम उनके साथ पूरी तरह से खड़े हैं.”

आज दोपहर जुमे की नमाज के बाद इमरान खान ने मुजफ्फराबाद के लोगों को इस रैली में शिरकत करने का हुक्म दिया गया है. सूत्रों के मुताबिक जलसे के लिए लोगों को इकट्ठा करने का जिम्मा पीओके की खुफिया पुलिस को सौंपा गया है.

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद इमरान खान अपनी जनता को भारत के खिलाफ भड़काकर आर्थिक मोर्चे पर अपनी नाकामी छुपाने की हरसंभव कोशिश कर रहे है. सबसे पहले तो उन्होंने कश्मीर ऑवर का फंडा आजमाया. इसके तहत उन्होंने अपने कौम के लोगों से अपील की कि वे हर शुक्रवार को दोपहर 12 से 12.30 बजे तक सड़कों पर निकले और कश्मीरियों के प्रति अपनी एकजुटता जाहिर करें.

इस मुहिम में कुछ खास कामयाबी न हासिल होने के बाद इमरान ने अब जलसा का दांव चला है. बता दें कि अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद ये उनका तीसरा मुजफ्फराबाद दौरा है. 14 अगस्त को उनका पहला मुजफ्फरबाद दौरा हुआ उसके बाद 6 सिंतबर को एलओसी पर दूसरा दौरा हुआ और अब इसके 7 दिन बाद आज तीसरा दौरा होने जा रहा है.

इमरान खान लगातार कश्मीरियों को झांसा दे रहे हैं और पाकिस्तान को उनके हमदर्द के तौर पर पेश कर रहे हैं, दूसरा वे दुनिया को जताना चाहते हैं कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोग उनके साथ खड़े हैं. हालांकि हकीकत ये है कि पाक अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तानी सेना वहां की आवाम पर लगातार जुल्म ढा रही है. पीओके के थट्टा पानी में कश्मीरियों पर पाक सेना की गोलाबारी इसका ताजा सबूत है.