1 अप्रैल से शुरू होगी NPR की प्रक्रिया, सबसे पहले होगा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का नामांकन

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नई दिल्ली: एक अप्रैल से राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अपडेट करने की कवायद शुरू होने जा रही है. देश के पहले नागरिक के तौर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का नामांकन सबसे पहले किया जाएगा. इसके बाद उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नाम भी एनपीआर सूची में शामिल होगा. नामांकन के लिए भारत के रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय (ORGI) ने राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सुविधाजनक समय की मांग करने वाले पत्र भेजे हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओआरजीआई नामांकन के पहले दिन यानी 1 अप्रैल को देश की तीनों शीर्ष पदाधिकारियों का डेटा सूची में शामिल करने की संभावना जता रहा है. देश के राष्ट्रपति का नामांकन गृहमंत्री, रजिस्ट्रार जनरल, जनगणना आयुक्त और जनगणना संचालन निदेशक की मौजूदगी में दिल्ली में होने की उम्मीद है. यही टीम दिल्ली में पीएम और वाइज प्रेसिडेंट की गणना को देखेगी. बता दें कि तीनों के आवास नई दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत आते हैं.

राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से एनपीआर की प्रक्रिया शुरू करके रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कार्यालय का इरादा इसे बड़े स्तर पर प्रचारित करने का है, ताकि देश की जनता तक संकेत पहुंचाया जा सके.

डेटाबेस तैयार किया जाएगा
बता दें कि नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) के तहत एक अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर, 2020 तक नागरिकों का डेटाबेस तैयार करने के लिए देशभर में घर-घर जाकर जनगणना की तैयारी है. यह नागरिकता अधिनियम 1955 और 2003 के नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करना) नियमों के प्रावधानों के तहत स्थानीय (गांव/उप-कस्बे), उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जा रहा है.

क्या है NPR
एनपीआर का पूरा नाम नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर है. देश के सामान्य निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना इसका मुख्य लक्ष्य है. इस डेटा में जनसांख्यिंकी के साथ बायोमेट्रिक जानकारी भी होगी.

यूपीए सरकार में शुरू हुई थी NPR की पहल
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार में 2010 में एनपीआर बनाने की पहल शुरू हुई थी. तब 2011 में जनगणना के पहले इस पर काम शुरू हुआ था. अब फिर 2021 में जनगणना होनी है. ऐसे में एनपीआर पर भी काम शुरू हो रहा है. एनपीआर और एनआरसी में अंतर है. एनआरसी के पीछे जहां देश में अवैध नागरिकों की पहचान का मकसद छुपा है, वहीं इसमें छह महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में रहने वाले किसी भी निवासी को एनपीआर में आवश्यक रूप से पंजीकरण करना होता है.

NPR का मकसद
बाहरी व्यक्ति भी अगर देश के किसी हिस्से में छह महीने से रह रहा है तो उसे भी एनपीआर में दर्ज होना है. एनपीआर के जरिए लोगों का बायोमेट्रिक डेटा तैयार कर सरकारी योजनाओं की पहुंच असली लाभार्थियों तक पहुंचाने का भी मकसद है.