11 साल से कोई श्रेष्ठ मंत्री-विधायक नहीं, अब कांग्रेस सरकार से जागी उम्मीदें

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भोपाल। प्रदेश में पिछले 11 साल से विधानसभा श्रेष्ठ मंत्री और विधायक नहीं ढूंढ पाई है। सरकार श्रेष्ठ मंत्री व विधायक का पुरस्कार देती है, लेकिन 2008 के बाद किसी को यह पुरस्कार नहीं दिए जा सके। अब 15वीं विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होना है, ऐसे में एक बार फिर श्रेष्ठ मंत्री-विधायक के पुरस्कार शुरू करने की मांग शुरू हो गई। पंद्रह साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस इसे लेकर गंभीर है, क्योंकि कांग्रेस सरकार में यह पुरस्कार दिए जाते थे। लेकिन भाजपा सरकार आई, तो केवल एक बार 2008 में ही यह पुरस्कार दे सकी। हालांकि एक बार में ही पांच सालों के पुरस्कार बांट दिए थे, लेकिन 2008 के अलावा हर बार कांग्रेस सरकार ने ही यह पुरस्कार दिए। इस कारण मंत्री-विधायकों को उम्मीद है कि कांग्रेस सरकार फिर इसे शुरू करेगी।

मध्यप्रदेश विधानसभा ने 15 दिसम्बर 1995 को ये पुरस्कार स्थापित किए गए। इसे विधानसभा संसदीय पुरस्कार नाम दिया गया। इसके तहत प्रतिवर्ष सदन में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विधायक, मंत्री का चयन कर पुरस्कार दिए जाता है। शुरूआत में यह क्रम निरंतर चला। लेकिन वर्ष 2008 के बाद यह सिलसिला थम गया। हालांकि इसके बाद श्रेष्ठ विधायक और मंत्री के चयन की प्रक्रिया शुरू हुई। विधायकों और मंत्रियों के आवेदन भी बुलाए गए। दो बार चयन कमेटी का गठन हुआ लेकिन कमेटी की बैठक नहीं हो सकी। ऐसे में चयन अटक गया। तब से यह पुरस्कार किसी को नहीं दिए गए। हालांकि हर विधानसभा में यह मांग उठती रही है, लेकिन यह पूरी नहीं हो सकी।

चार श्रेणी के हैं पुरस्कार –
– प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल की स्मृति में उत्कृष्ट मंत्री पुरस्कार

– प्रदेश के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष पंडित कुंजीलाल दुबे की स्मृति में उत्कृष्ट विधायक पुरस्कार
– प्रदेश के प्रथम नेता प्रतिपक्ष विश्वनाथ यादवराव ताम्रकार की स्मृति में उत्कृष्ट संसदीय पत्रकारिता पुरस्कार

– प्रदेश के प्रथम विधानसभा सचिव रांगोले की स्मृति में उत्कृष्ट विधानसभा कर्मी पुरस्कार

कब किसे मिला पुरस्कर –
वर्ष 1995 –

उत्कृष्ट मंत्री – हरवंश सिंह, सत्यदेव कटारे, चरणदास महंत।
उत्कृष्ट विधायक – थावरचंद गहलोत, बच्चन नायक, घनश्याम पाटीदार।

वर्ष 1996 में –
उत्कृष्ट मंत्री – नरेन्द्र नाहटा मंत्री, रविन्द्र चौबे, जमुना देवी।

उत्कृष्ट विधायक – लक्ष्मीकांत शर्मा, गोपीचंद नेमा, चंद्रप्रकाश बाजपेयी।

वर्ष 1997 –
उत्कृष्ट मंत्री – नर्मदा प्रसाद प्रजापति, बालेन्द्र शुक्ल, धनेश पाटिला, डॉ. प्रेमसाय सिंह, राजेन्द्र सिंह।

उत्कृष्ट विधायक – लल्लू सिंह, बृजमोहन अग्रवाल, डॉ. गोविंद सिंह, सुरेन्द्र सिंह सिसोदिया, करुणा शुक्ला

वर्ष 2000 –
उत्कृष्ट मंत्री – उर्मिला सिंह, महेन्द्र सिह, इंद्रजीत कुमार पटेल, अजय सिंह

उत्कृष्ट विधायक – प्रभाकर सिंह, चौधरी राकेश सिंह, सुधा जैन, नित्यनिरंजन खंपरिया, राजेन्द्र भारती।

वर्ष 2008 –
उत्कृष्ट मंत्री – नरोत्तम मिश्रा, अनूप मिश्रा, नरेन्द्र सिह तोमर, हिम्मत सिंह कोठारी, राघवजी

उत्कृष्ट विधायक – लालसिंह आर्य, बृजेन्द्र सिहं राठौर, सत्यदेव कटारे, दुर्गालाल विजय, सरोज बच्चन नायक।

मुझे याद है मेरे पिता के समय संसदीय पुरस्कार मिलते थे। लेकिन अब यह पुरस्कार नहीं मिल रहे हैं। विधानसभा को ये पुरस्कार फिर से शुरू किए जाना चाहिए।

– हिना कांवरे, विधानसभा उपाध्यक्ष
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कार्य का मूल्यांकन होना चाहिए। यह बेहतर परम्परा थी, इसे दोबारा शुरू करवाने के लिए मैंने पूर्व में स्पीकर से चर्चा भी की थी। मैं चाहता हूं कि संसदीय पुरस्कार फिर से शुरू होना चाहिए।

– मोहन यादव, विधायक

बेहतर कार्य का मूल्यांकन होना चाहिए। श्रेष्ठ कार्य की सराहना होती होती है तो लोगों के कार्य करने का उत्साहन दोगुना होता है। विधानसभा संसदीय पुरस्कारों फिर से शुरू हों, इसके लिए स्पीकर से चर्चा की जाएगी। स्पीकर के निर्णय के बाद आगे की कार्यवाही शुरू होगी।

– वीरेन्द्र कुमार, अपर सचिव मध्यप्रदेश विधानसभा