Nirbhaya Case: एक तय समय में हो जाए फांसी की सजा, केंद्र सरकार पहुंची SC

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नई दिल्‍ली: निर्भया (Nirbhaya) के गुनहगारों की फांसी की सजा के अमल में हो रही देरी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने फांसी की सजा पाए दोषियों के कानूनी राहत के अधिकार को लेकर 2014 के शत्रुघ्न चौहान जजमेंट में दी गई व्यवस्था में बदलाव की मांग की है. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा कि मृत्यु दंड के मामलों में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पीड़ित को राहत देने के बजाय दोषियों को ही राहत या विकल्प मुहैया कराने पर फोकस रखती है. शत्रुघ्न चौहान मामले में आई सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन को सरकार ने चुनौती दी है.

सरकार ने मांग की है:-

– फांसी की सजा पाए दोषियों की पुनर्विचार अर्जी खारिज होने के बाद क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने के लिए उन्हें एक निश्चित समयसीमा ही मिलनी चाहिए.

– अगर कोई दोषी दया याचिका दाखिल करना चाहता है तो ये साफ होना चाहिए कि निचली अदालत द्वारा डेथ वारंट जारी होने के सात दिनों के अंदर ही उसे दया याचिका दायर करनी होगी.

– SC, कोर्ट, राज्य सरकारों और जेल अधिकारियों को निर्देश दे कि दया याचिका खारिज होने के 7 दिनों के अंदर डेथ वारंट जारी किया जाए और इसके अगले सात दिनों के अंदर फांसी की सजा पर अमल हो. भले ही दोषी की याचिका (रिव्यू, क्यूरेटिव, दया याचिका) किसी भी स्टेज पर हो.

केंद्र सरकार ने कहा की फांसी की सजा पाए दोषी की पुनर्विचार याचिका, भूल सुधार याचिका और दया याचिका के निपटारे की समय सीमा तय होनी चाहिए.

केंद्र सरकार ने कहा कि अगर कोई राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल करना चाहता है तो डेथ वारंट जारी होने के सात दिन के अंदर ही करने की अनुमति हो. केंद्र सरकार ने कहा कि अगर किसी की दया याचिका खारिज हो जाती है तो उसे सात दिनों के अंदर फांसी दे दी जाए.

उसकी पुनर्विचार याचिका या भूल सुधार याचिका का कोई महत्व ना हो. अगर राष्ट्रपति दया याचिका खारिज कर देते हैं तो सात दिनों में फांसी हो जानी चाहिए. केंद्र सरकार ने ये भी मांग की है कि कोर्ट के साथ-साथ राज्य सरकार और जेल अधिकारी को भी डेथ वारंट जारी करने का अधिकार दिया जाए. फिलहाल सिर्फ मजिस्ट्रेट ही डेथ वारंट जारी कर सकते हैं.