मोदी सरकार घाटी की स्थिति से अवगत कराने के लिए विदेशी राजनयिकों को 9 व 10 को भेजेंगे कश्मीर

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नई दिल्ली। कश्मीर की स्थिति से विदेशी राजनयिकों को अवगत कराने के लिए भारत उन्हें इसी हफ्ते घाटी ले जाएगा। 9 व 10 जनवरी को यूरोपीय संघ, आसियान, दक्षिणी अमेरिकी व कुछ अफ्रीकी देशों के राजदूतों को कश्मीर के दौरे पर ले जाने का फैसला किया गया है।

विदेशी राजनयिक आम जनता से मिलेंगे, सुरक्षा स्थिति का जायजा भी लेंगे

वहां जाने वाले विदेशी राजनयिकों को आम जनता से मिलने, सुरक्षा स्थिति का जायजा लेने और पत्रकारों व नागरिक संगठनों से मिलने का पूरा मौका दिया जाएगा। 5 अगस्त, 2019 को कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद यह पहला मौका होगा जब सरकार की तरफ से विदेशी राजनयिकों को कश्मीर ले जाया जाएगा। हालांकि इस बीच यूरोपीय संघ के कुछ सांसदों ने भी कश्मीर का दौरा किया था।

विदेशी अखबार भारत की छवि एक अलोकतांत्रिक देश के तौर पर पेश कर रहे हैं

सूत्रों के मुताबिक वहां के स्थानीय पत्रकारों से मिलने का मौका दिए जाने के बावजूद अभी तक राजनयिकों की तरफ से वहां प्रेस कांफ्रेंस करने की कोई योजना नहीं है। यह दौरा सरकार ने तब करवाने का फैसला किया जबकि कश्मीर को विशेष दर्जा दिए जाने संबंधी प्रावधान को समाप्त किये जाने को लेकर विदेशों में सवाल उठाए जा रहे हैं। अमेरिका व ब्रिटेन के कई सांसद लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं जबकि कई विदेशी अखबार भी इस फैसले की आड़ में भारत की छवि एक अलोकतांत्रिक देश के तौर पर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

विदेशों में भारत विरोधी खबरों के छपने से निवेश पर असर पड़ने की आशंका

विदेशी अखबारों में लगातार भारत विरोधी खबरों के छपने से सरकार भी चिंतित है क्योंकि इसका दूरगामी असर निवेश पर भी पड़ने की आशंका है। यूरोपीय संघ के कुछ सांसदों के कश्मीर दौरे को बाद में सरकार ने स्वयं बताया कि वह उनका निजी दौरा था।