फिर छलका सिंधिया का दर्द, कहा- ‘कुर्सी त्यागना बड़ी बात, कभी किसी पद के पीछे नहीं भागा’

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भोपाल: कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का सीएम न बन पाने का दर्द बाहर आ ही गया. भोपाल में आयोजित सेवादल के प्रशिक्षण शिविर में सिंधिया ने कहा कि आसान नहीं होता है कुर्सी को ठुकराना. बैरागढ़ में आकाश गार्डन में सेवा दल के प्रशिक्षण शिविर में सिंधिया ने कहा कि आप लोगों ने दिसंबर में भी देखा होगा. मुझे कुर्सी का लालच नहीं है. मेरे लिए राजनीति जनसेवा का जरिया है.

प्रशिक्षण शिविर में संबोधित करते हुए सिंधिया ने कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा कि कुर्सी पाने के लिए व्यक्ति को चाहे 10 लोगों के सिर काटने पड़े, वो काट देता है. दूसरी तरफ सद्भाव की नीति होती और इसका चरित्र मैंने सेवादल में पाया है. उन्होंने कहा कि सेवादल, कांग्रेस के लिए नहीं बल्कि देश के लिए हौसला है.

सेवादल का कार्यकर्ता एक कार्यकर्ता नहीं सैनिक है. हमारी सफेद टोपी शुद्धता और देश के प्रत्येक नागरिक का प्रतीक है. हर धर्म से जुड़े व्यक्ति का प्रतीक है. इस विचार को हमे बढ़ावा देना है. सिंधिया ने कहा कि इतिहास उठाकर देख लो अगर सेवादल न होता तो भारत को स्वतंत्रता न मिलती.

सिंधिया ने कहा कि आज हमे चर्चा करनी होगी कि सेवादल की वर्तमान जिम्मेदारी की, हर दशक में आपने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई है, आज देश आपको पुकार रहा है. कार्यकर्ताओं में जान फूंकते हुए सिंधिया ने कहा कि मैं सेवादल से मांग रखता हूं कि जिस सेवादल को 15-20 साल से बंद मुट्ठी में रखा गया है, उसे आप खोल दें.

एनआरसी और सीएए पर बोलते हुए सिंधिया ने कहा कि जैसे नोटबंदी के जरिये लोगों को लाइन में खड़ा किया, वैसे ही एनआरसी के द्वारा किया जायेगा. दुनिया के शरणार्थियों से उनकी पैदाइश और अस्तित्व का पूछने का हक किसने दिया है. जो आर्थिक शक्ति देश की थी, जो कांग्रेस ने 70 साल में बनाई, आज उस शक्ति को चूर-चूर किया जा रहा है.

वर्तमान परिस्थिति में पूरी गंभीरता के साथ काम करने की जरूरत है. जो परिस्थितियां बन रही हैं देश में वो चिंताजनक हैं. जो हमारे देश में विघटनकारी तत्व हैं, उन्हें मुंहतोड़ जवाब देना होगा.

देश में हो रहे दंगों के पीछे कांग्रेस के हाथ वाले अमित शाह के बयान पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पलटवार करते हुए कहा कि आज गांधी के देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने की कोशिश हो रही है. युवा पीढ़ी में संघर्ष नजर आ रहा है. सरकार को युवाओं की आवाज सुननी होगी.