जावड़ेकर ने कहा- पूरे 21 दिनों तक देश में खुली रहेंगी जरूरी सामान और दवाओं की दुकानें

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नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को कहा कि लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि जरूरी सामान और दवाओं की दुकानें लॉकडाउन के दौरान पूरे 21 दिनों तक खुली रहेंगी। कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देने के क्रम में जावडेकर ने कहा कि लॉकडाउन को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं ताकि लोगों को परेशानी न हो।

जावड़ेकर ने कहा- जनता कर्फ्यू के दौरान इन्हीं योद्धाओं के लिए तालियां बजाई थीं

कुछ रेजीडेंट वेलफेयर एसोशिएशनों द्वारा डॉक्टरों और पत्रकारों को बाहर नहीं निकलने या अपार्टमेंट छोड़कर जाने की चेतावनी देने के बारे में पूछे गए सवाल पर जावडेकर ने कहा कि ऐसी कृत्यों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। जनता कर्फ्यू के दौरान लोगों ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ रहे इन्हीं योद्धाओं के लिए तालियां बजाई थीं।

सरकार ने सुझाए घर पर समय बिताने के कुछ तरीके

सरकार सोशल मीडिया के जरिये लोगों को घर पर रहने के लिए प्रेरित कर रही है। इसी कड़ी में सरकार ने लॉकडाउन के 21 दिनों के दौरान घर पर रहकर समय का सदुपयोग करने के कुछ उपाय सुझाए हैं। प्रेस इंफॉरमेशन ब्यूरो (पीआइबी) के ट्विटर हैंडल से लोगों को सुझाव दिया गया है, ‘आज से शुरू हुए अगले 21 दिनों का इस्तेमाल साधारण नई आदतें विकसित करने में किया जा सकता है। मसलन सुबह जल्दी उठना, नया आहार अपनाना, ध्यान लगाना इत्यादि।’ एक अन्य ट्वीट में कहा गया है, ‘ये 21 दिन सिर्फ अच्छी आदतों तक सीमित न रहें.. आप इनका इस्तेमाल बुरी आदतों को छोड़ने के लिए भी कर सकते हैं।’ इसके अलावा लोगों को योग अथवा जर्मन भाषा सीखने की सलाह भी दी गई है।

करीब नौ लाख करोड़ का पड़ेगा लॉकडाउन

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप से निपटने के लिए बुधवार से अगले 21 दिन तक पूरे देश को लॉकडाउन करने का फैसला आर्थिक तौर पर आसान नहीं है। विश्लेषकों के मुताबिक इसकी वजह से देश को इन 21 दिनों में ही 12,000 करोड़ डॉलर यानी करीब नौ लाख करोड़ रुपये के नुकसान का अंदेशा जताया गया है। ब्रिटिश ब्रोकरेज हाउस बार्कलेज के विश्लेषकों ने बुधवार को भारत को लेकर अपने ग्रोथ के अनुमान में बड़ी कटौती की और आर्थिक पैकेज की जरूरत पर जोर दिया।

आरबीआई रेपो रेट में बड़ी कटौती कर सकता है

बार्कलेज ने अपने एक नोट में वित्त वर्ष 2020-2021 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 1.7 फीसद घटाकर 3.5 फीसद कर दिया है। विकास दर अनुमान में यह कटौती इस लिहाज से अहम हो गई है, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक तीन अप्रैल को मौद्रिक नीति की समीक्षा करने वाला है। विश्लेषकों को उम्मीद है कि इस बार आरबीआई रेपो रेट में बड़ी कटौती कर सकता है। एक अनुमान यह भी है कि सरकार राजकोषषीय घाटे का लक्ष्य पार कर सकती है।