अमेरिका के लिए जासूसी करने वाले को ईरान ने दिया मृत्युदंड, दो अन्य को सुनाई जेल की सजा

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दुबई । ईरान के सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए के लिए जासूसी के दोषी पाए गए एक व्यक्ति को सुनाई गई मौत की सजा पर मुहर लगा दी है। उस पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में भी जानकारी लीक करने का दोष सिद्ध हुआ है। दो अन्य जासूसों की सजा पर भी सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। इन दोनों को अमेरिका के लिए जासूसी करने के आरोप में दस साल और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम करने के लिए पांच साल कैद की सजा सुनाई गई थी।

न्यायिक प्रवक्ता गुलाम हुसैन इस्माइल ने मंगलवार को बताया, सीआइए के लिए जासूसी करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम की जानकारी लीक करने वाले आमिर रहीमपुरा की मौत की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। उसे जल्द ही अपने किए की सजा मिलेगी। प्रवक्ता ने अमेरिका के लिए जासूसी करने पर सजा पाने वाले दो अन्य लोगों की राष्ट्रीयता और उनके नामों के बारे में अन्य कोई जानकारी नहीं दी। लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि ईरान दोहरी नागरिकता को मान्यता नहीं देता। अगर किसी के पास दोहरी नागरिकता है तो ऐसे नागरिकों के खिलाफ ईरानी नागरिक के तौर पर मुकदमा चलाया जाता है।

ईरान ने पिछली गर्मियों में सीआइए के जासूसी कांड के भंडाफोड़ का दावा करते हुए 17 लोगों को पकड़ा था। इनमें से कई को मौत की सजा सुनाई गई थी।

पूर्व वैज्ञानिक को दी थी फांसी

ईरान ने वर्ष 2016 में जासूसी के आरोप में पूर्व परमाणु वैज्ञानिक शहराम अमीरी को फांसी दे दी थी। अमीरी वर्ष 2009 में सऊदी अरब में मुस्लिम धर्मस्थलों के तीर्थाटन के दौरान गायब हो गए थे। एक साल बाद वह एक ऑनलाइन वीडियो में दिखे थे जिसे अमेरिका में फिल्माया गया था। इसके बाद वह वाशिंगटन स्थित पाकिस्तान दूतावास में ईरान संबधों को देखने वाले विभाग में पहुंचे और स्वदेश भेजे जाने की मांग की। 2010 में तेहरान लौटने पर उनका नायक की तरह स्वागत हुआ था। लेकिन बाद में वह गुपचुप तरीके से गायब हो गए। कहा जाता है कि उन पर मुकदमा चलाया गया और फांसी दे दी गई।