NISSAN के पूर्व चैयरमैन कार्लोस को म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट में बैठकर जापान से क्‍यों भागना पड़ा?

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भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे जापान की मशहूर कार कंपनी निसान (NISSAN) के पूर्व चैयरमैन कार्लोस घोसन (Carlos Ghosn) को लेकर एक अनोखी खबर सामने आई है. कार्लोस घोसन सुरक्षा-कर्मियों की घेराबंदी तोड़ते हुए एक वाद्य यंत्र यानि म्यूडिकल इंस्ट्रूबमेंट में बैठकर निकल भागे. इस अजीब दिलचस्प खबर ने छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े एक किस्से की याद दिला दी. आपने छत्रपति शिवाजी की वो कहानी तो सुनी ही होगी, जिसमें वो मिठाई के टोकरों में बैठकर औरंगजेब की कैद से निकलने में कामयाब हो गए थे. हालांकि दोनों घटनाओं में फर्क है . शिवाजी ने उस ज़माने में, धूर्त औरंगजेब को जवाब देने के लिए ऐसा किया था, जबकि कार्लोस पर खुद भ्रष्टाचार के आरोप हैं .

कार्लोस पर आरोप है कि उन्होंने निसान कंपनी में वित्तीय हेराफेरी की और कंपनी के 130 करोड़ रुपये निजी इस्तेमाल के लिए खर्च कर दिए . उन्होंने पेरिस, बेरूत, रिओ-डी-जिनेरियो (Rio de Janeiro) और एम्सटर्डैम (Amsterdam) में मकान खरीदे और टोक्यो में अपने फ्लैट की इंटीरियर डिजाइन पर करीब 23 करोड़ रुपये खर्च किए . कार्लोस को 19 नवंबर, 2018 को टोक्यो एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया था . मार्च 2019 में उन्हें 63 करोड़ रुपये के बॉन्ड पर ज़मानत मिली थी, जो कि जापान के इतिहास में ज़मानत की सबसे महंगी रकम है .

कार्लोस की दोबारा गिरफ्तारी हुई और फिर से ज़मानत भी मिल गई, लेकिन शर्त ये था कि वे जापान छोड़ कर नहीं जाएंगे . उन्हें टोक्यो में उनके घर में ही नज़रबंद रखा गया था . घर के बाहर वीडियो कैमरे लगे थे . कई सुरक्षाकर्मी उन पर नजर रखे हुए थे . फिर भी कार्लोस जापान की पकड़ से काफी दूर लेबनान (Lebanon) भागने में कामयाब हो गए . कहा जा रहा है कि इस काम में कार्लोस की मदद उनकी पत्नी कैरोले (Carole) ने की .

रिपोर्ट के मुताबिक कार्लोस के भागने की योजना करीब तीन महीने पहले ही बन चुकी थी . एक प्राइवेट सिक्योरिटी फर्म को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी . कार्लोस ने क्रिसमस के मौके पर टोक्यो में अपने घर पार्टी रखी थी . अनुमान लगाया जा रहा है कि इसी दौरान 5 फिट 6 इंच के कार्लोस ने खुद 6 फिट के वाद्य यंत्र में बंद किया और घर से बाहर निकल गए .

ये म्यूजिकल इंसट्रूमेंट जब कार्लोस के घर से बाहर निकला तो किसी को शक नहीं हुआ, क्योंकि उन्होंने पार्टी में एक क्रिसमस बैंड को बुलाया था . घर से निकलकर कार्लोस जापान के एक छोटे से एयरपोर्ट पर गए …और इसके बाद वो प्राइवेट प्लेन से पहले टर्की के शहर इस्तांबुल और उसके बाद लेबनान की राजधानी बेरूत पहुंच गए .

कार्लोस के पास तीन देश फ्रांस, लेबनान और ब्राजील की नागरिकता है . उनके पासपोर्ट जापान की सरकार ने जब्त कर लिए थे, लेकिन कार्लोस जापान से भागने में कामयाब हो गए . उन्होंने जापान के छोटे से एयरपोर्ट का इस्तेमाल इसलिए किया ताकि लोग उन्हें पहचान न सकें . लेबनान के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें आदेश मिला था कि वो इमिग्रेशन जांच न करें .

कार्लोस के भाग निकलने से जापान में अफरातफरी मची हुई है, वहीं लेबनान में उन्हें हीरो की तरह देखा जा रहा है . उनका जन्म ब्राजील में हुआ था, लेकिन वो बचपन से ही लेबनान में रहे . लेबनान के लोग उन्हें एक business tycoon के रूप में देखते हैं . लेबनान और जापान के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं है . ऐसे में कार्लोस को जापान ले जाना आसान नहीं होगा .आम तौर पर कार्लोस जैसे भगोड़े न्याय और अन्याय की बातें भी करते हैं . कार्लोस का भी कहना है कि उन्होंने जापान इसलिए छोड़ दिया क्योंकि वहां की न्याय व्यवस्था निष्पक्ष नहीं है और जापान में उनके साथ अन्याय हो रहा था .

जापान की न्यायिक व्यवस्था सबूतों से ज्यादा इकबालिया बयान पर विश्वास करती है . वहां सजा की दर करीब 100 प्रतिशत है . यानी जिसे वहां की पुलिस पकड़ लेती है, वह गुनहगार साबित हो ही जाता है . जापान में किसी भी व्यक्ति को उसकी गलती बताए बिना 23 दिन तक हिरासत में रखा जा सकता है . इस दौरान उससे कड़ी पूछताछ की जाती है . कई बार आरोपी को वकील से भी नहीं मिलने दिया जाता है .

ऐसा माना जाता है कि पूछताछ के दौरान जापान की पुलिस कोई भी जुर्म कबूल करवा सकती है . लेकिन फिलहाल जापान के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कार्लोस को वापस लाए कैसे ?